अल्जाइमर रोग कैसे होता है? (What Causes Alzheimer's Disease?)
Alzheimer's Disease तब विकसित होता है, जब दिमाग में दो विशेष प्रोटीन गलत तरीके से जमा होकर गुच्छे (Plaques) और उलझनें (Tangles) बना देते हैं। यह स्थिति दिमाग की नसों (Brain Cells) के आपसी कनेक्शन को तोड़ देती है, जिससे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की क्षमता और फैसले लेने की शक्ति धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। लेकिन घबराएं नहीं, सही समय पर पहचान होने से इसे संभाला जा सकता है! आइए आगे जानते हैं अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण क्या हैं और शरीर में ऐसे कौन-से बदलाव दिखते ही आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण क्या हैं? (Early Symptoms of Alzheimer's Disease?)
अल्जाइमर के शुरूआती लक्ष्ण चेतावनी के संकेतों के साथ शुरू होता है, जिनकी जांच डॉक्टर से करवाना ज़रूरी है। अल्ज़ाइमर के कुछ आम लक्षणों पर एक नज़र नीचे दी गई है:
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उसी समय की बातचीत, कहीं जाना या किसी इवेंट भूल जाना
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एक ही सवाल को बार-बार कहना
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सामान को सही जगह पर ना रखकर गलत जगह पर रख देना
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समय, तारीखों या जानी-पहचानी जगहों को लेकर कन्फ्यूज़ होना
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शब्द खोजने या बातचीत समझने में परेशानी
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प्लान बनाने, प्रॉब्लम सॉल्व करने या फाइनेंस मैनेज करने में मुश्किल होना
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रोज़ाना के जाने-पहचाने काम पूरे करने में परेशानी होना
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मूड, पर्सनैलिटी या सोशल बिहेवियर में बदलाव आना
अल्जाइमर के लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए (Alzheimer's Symptoms You Should Not Ignore)
अल्जाइमर (Alzheimer's Disease) के कुछ लक्ष्ण दिए हुए हैं, जिन्हें आपको कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था
| अल्जाइमर के लक्ष्ण (Alzheimer Symptoms) | यह क्या संकेत दे सकता है |
| हाल की बातचीत या भोजन बार-बार भूल जाना | नई यादें बनाने और स्टोर करने में मुश्किल बढ़ रही है |
| जानी-पहचानी सड़कों पर या जानी-पहचानी जगहों पर खो जाना | ओरिएंटेशन और विज़ुअल-स्पेशियल प्रोसेसिंग में समस्याएँ |
| पैसे, दवाइयों या घर के कामों को मैनेज करने में मुश्किल | निर्णय लेने, योजना बनाने और निर्णय लेने की क्षमता में कमी |
| आम शब्द खोजने या बातचीत समझने में मुश्किल होना | भाषा और संचार कौशल में गिरावट |
| शक, गुस्सा, अलग-थलग रहना या पर्सनैलिटी में बदलाव दिखना | डिमेंशिया से जुड़े व्यवहार और मनोवैज्ञानिक बदलाव |
| कपड़े पहनने, नहाने या खाने में मदद की ज़रूरत | रोज़ाना के कामों में आज़ादी का नुकसान बढ़ता जा रहा है |
| निगलने में दिक्कत, बार-बार दम घुटना या बिना किसी वजह के वज़न कम होना | गंभीर बीमारी जिसमें खराब पोषण या फेफड़ों में भोजन जाने का खतरा हो |
अल्जाइमर के लक्षण जिनके लिए तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है? (Alzheimer's Symptoms That Require Immediate Medical Attention)
आइए नीचे दिए गए लक्षणों में से एक या ज़्यादा दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेने की सलाह दी जाती है:
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अचानक कन्फ्यूजन या जागरूकता का तेजी से बिगड़ना
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शरीर के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन
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चेहरा लटकना या अचानक साफ़ न बोलना
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दौरा पड़ना या बेहोशी
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सांस लेने में गंभीर कठिनाई या घुटन
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गंभीर रूप से गिरना या सिर में चोट लगना
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तेज़ बुखार के साथ नया कन्फ्यूजन या बहुत ज़्यादा नींद आना
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लगातार उल्टी होना या तरल पदार्थ न पी पाना
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बहुत ज़्यादा गुस्सा जिससे व्यक्ति या दूसरे लोग तुरंत खतरे में पड़ जाएं
अल्जाइमर से जुड़ी खास स्थितियों के लक्षण (Alzheimer's Symptoms in Specific Situations)
कुछ लोगों में अल्ज़ाइमर के ऐसे लक्षण हो सकते हैं जिनमें याददाश्त कम होना पहला लक्षण नहीं होता। ऐसे लक्षणों की जांच किसी न्यूरोलॉजिस्ट या कॉग्निटिव डिसऑर्डर के अनुभवी किसी दूसरे डॉक्टर से करवानी चाहिए।
इनमें से कुछ अल्ज़ाइमर-स्पेसिफिक प्रेजेंटेशन नीचे दी गई टेबल में दिए गए हैं:
| अल्जाइमर प्रस्तुति (Alzheimer's Presentation) | सामान्य प्रारंभिक लक्षण (Common Early Symptoms) |
| सामान्य स्मृति-प्रेरित अल्ज़ाइमर रोग (Typical Memory-Led Alzheimer's Disease) | हाल ही में याददाश्त कम होना, बार-बार सवाल पूछना, चीज़ें गलत जगह रखना और नई जानकारी सीखने में दिक्कत होना |
| पश्च कॉर्टिकल शोष (Posterior Cortical Atrophy) | पढ़ने, दूरी का अंदाज़ा लगाने, चीज़ों तक पहुँचने, चीज़ों को पहचानने या आस-पास की चीज़ों को समझने में मुश्किल होना |
| लॉगोपेनिक प्राथमिक प्रगतिशील वाचाघात (Logopenic Primary Progressive Aphasia) | बार-बार रुकना, शब्द खोजने में मुश्किल, धीमी आवाज़ और वाक्य दोहराने में परेशानी |
| ललाट या व्यवहारिक प्रस्तुति (Frontal or Behavioural Presentation) | फैसले, प्लानिंग, मोटिवेशन, सोशल बिहेवियर या इंपल्स कंट्रोल में शुरुआती बदलाव |
अल्जाइमर के लक्षणों का पता कैसे लगाया जाता है? (How Is Alzheimer's Disease Diagnosed?)
अल्ज़ाइमर रोग की पहचान केवल किसी एक टेस्ट से नहीं होती, बल्कि डॉक्टर कई अलग-अलग तरीकों से इस रोग की पहचान करते हैं। आइए नीचे दिए गए बिंदुओं की मदद से समझते हैं कि अल्जाइमर के लक्ष्णों का कैसे पता करें:
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परिवार से बातचीत: डॉक्टर मरीज और उनके घर वालों से याददाश्त और स्वभाव में आए बदलावों के बारे में पूछते हैं, की वह कितने समय से ऐसा बर्ताव या चीजों को भुल रहे हैं
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मस्तिष्क की ेपरीक्षा: मरीज से आज की तारीख पूछना, आसान सवाल पूछना या चित्र बनवाकर देखना।
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दिमाग का टेस्ट: इससे देखा जाता है कि दिमाग सिकुड़ रहा है या नहीं, और उसमें प्रोटीन जमा हैं या नहीं।
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ब्लड और यूरीन टेस्ट: यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि भूलने की वजह अल्ज़ाइमर ही है या फिर खून की कमी, थायरॉइड, विटामिन B12 की कमी या इन्फेक्शन जैसा कोई अन्य कारण है।
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लक्षणों की हिस्ट्री: डॉक्टर यह समझते हैं कि भूलने की बीमारी कब शुरू हुई, यह कितनी तेज़ी से बढ़ रही है और इससे रोज़मर्रा के कामों पर क्या असर पड़ रहा है।
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शारीरिक और नसों की जाँच: इसमें मरीज के चलने का तरीका , शरीर की ताकत, रिफ्लेक्स और नसों की सेहत को चेक किया जाता है।
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MMSE और एडेनब्रुक टेस्ट: यह एक खास टेस्ट होता है, जिससे दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के काम करने की क्षमता का सटीक पता चलता है।
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रोज के काम की जाँच: देखा जाता है कि मरीज पैसे का हिसाब, दवाइयां लेना, खाना बनाना, कपड़े पहनना और खुद की देखभाल जैसे काम कर पा रहा है या नहीं।
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ब्रेन स्कैन - MRI या CT Scan: दिमाग का स्कैन करके स्ट्रोक, ट्यूमर, अंदरूनी ब्लीडिंग या दिमाग के सिकुड़ने की जाँच की जाती है।
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न्यूरोसाइकोलॉजिकल डिटेल टेस्ट: जब बीमारी के लक्षण बहुत उलझे हुए हों, तब गहराई से दिमागी और सोचने की क्षमता का टेस्ट करने के लिए यह स्पेशल टेस्ट किया जाता है।
अल्जाइमर के लक्षण कब जानलेवा बन सकते हैं? (When Can Alzheimer's Symptoms Become Life-Threatening?)
अल्ज़ाइमर के कुछ लक्षण अगर इलाज न किया जाए तो जानलेवा हो सकते हैं और तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है। इनमें शामिल हैं:
| गंभीर समस्या | क्या हो सकता है ? |
| आकांक्षा का निमोनिया (Aspiration Pneumonia) | निगलने में दिक्कत होने पर खाना, लिक्विड या लार फेफड़ों में जा सकता है और इन्फेक्शन हो सकता है। |
| गंभीर निर्जलीकरण (Severe Dehydration) | कोई व्यक्ति पीना भूल सकता है, प्यास बताने की क्षमता खो सकता है या तरल पदार्थ निगलने में कठिनाई हो सकती है। |
| कुपोषण (Malnutrition) | खाना पहचानने, बर्तन इस्तेमाल करने या निगलने में दिक्कत होने से बहुत ज़्यादा वज़न कम हो सकता है और कमज़ोरी हो सकती है। |
| गंभीर संक्रमण या प्रलाप (Severe Infection or Delirium) | निमोनिया, यूरिनरी इन्फेक्शन या कोई दूसरी बीमारी अचानक कन्फ्यूजन, होश में कमी या तेजी से शारीरिक कमजोरी का कारण बन सकती है। |
| गिरना और सिर में चोट लगना (Falls and Head Injuries) | गलत फैसला, बैलेंस बिगड़ना और दूरी का अंदाज़ा लगाने में दिक्कत से गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। |
| लंबे समय तक गतिहीनता (Prolonged Immobility) | कम मूवमेंट से प्रेशर इंजरी, इन्फेक्शन, ब्लड क्लॉट और फिजिकल ताकत में कमी हो सकती है। |
अल्जाइमर से बचाव के तरीके क्या हैं? (How to Prevent Alzheimer's Disease?)
अल्जाइमर से बचाव आप निम्नलिखित तरीको से कर सकते हैं:
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स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: अपनी दिनचर्या को अनुशासित रखें और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
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नियमित व्यायाम करें: रोज 30 मिनट वॉक, योग या हल्की कसरत से शरीर और दिमाग में ब्लड फ्लो बेहतर रखें।
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संतुलित व पौष्टिक भोजन खाएं: आहार में हरी सब्जियां, फल और नट्स शामिल करें ताकि दिमाग को जरूरी पोषण मिले।
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दिमाग को सक्रिय रखें: नई चीजें सीखें, किताबें पढ़ें या पहेलियां सुलझाएं ताकि दिमागी कोशिकाएं मजबूत रहें।
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बुरी आदतों से दूरी व पर्याप्त नींद: धूम्रपान और शराब से पूरी तरह परहेज करें और रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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प्रश्न: अल्जाइमर रोग के तीन लक्षण क्या हैं?
उत्तर: अल्ज़ाइमर रोग के तीन मुख्य लक्षण हैं: रोज़मर्रा की हालिया बातें भूलना, हिसाब-किताब या योजना बनाने में दिक्कत होना, और समय व जगह का भ्रम होना। आसान शब्दों में, यह बीमारी व्यक्ति के दिमाग की सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। -
प्रश्न: अल्जाइमर रोग क्या होता हैं?
उत्तर: अल्जाइमर मस्तिष्क से जुड़ी एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जो डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का सबसे आम प्रकार है। इसमें दिमाग की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और दैनिक कार्यों को करने की योग्यता प्रभावित होती है। -
प्रश्न: अगर आपको अल्जाइमर है तो कैसे चेक करें?
उत्तर: अल्ज़ाइमर की जाँच के लिए किसी डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाना ज़रूरी होता है। डॉक्टर सबसे पहले पेशेंट से उनके लक्षणों, पुरानी बीमारियों और फ़ैमिली हिस्ट्री के बारे में बात करते हैं। इसके बाद वे मेमोरी और दिमागी ताक़त चेक करने के लिए कुछ सिंपल टेस्ट करते हैं, शरीर और नसों की जाँच करते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर ब्रेन स्कैन (जैसे MRI या CT Scan) भी करवाते हैं।
