हाइपोथायरायडिज्म क्या है और इसके लक्षण क्यों दिखते हैं? (What Is Hypothyroidism?)
हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) वह स्थिति है जिसमें थायरॉयड ग्रंथि शरीर की जरूरत के मुताबिक थायरॉयड हार्मोन नहीं बना पाती। यह ग्रंथि मुख्य रूप से T4 (थायरोक्सिन) और T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) हार्मोन बनाती है, जो मेटाबॉलिज्म यानी शरीर के ऊर्जा इस्तेमाल की रफ्तार तय करते हैं।
इन हार्मोन की कमी होने पर शरीर की लगभग हर प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। आंतें धीमी चलती हैं (कब्ज), शरीर कम गर्मी बनाता है (ठंड लगना) और दिल की धड़कन भी धीमी हो सकती है। आगे बताए गए ज्यादातर लक्षण इसी धीमेपन का नतीजा हैं।
सबसे आम प्रकार, प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म, में हार्मोन घटने पर पिट्यूटरी ग्रंथि TSH का स्तर बढ़ा देती है, ताकि थायरॉयड को ज्यादा हार्मोन बनाने का संकेत मिले। इसीलिए ब्लड टेस्ट में TSH बढ़ा हुआ दिखता है।
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण (Symptoms of Hypothyroidism)
लक्षण आमतौर पर दो चरणों में दिखते हैं। शुरुआत में हल्के और आम लक्षण होते हैं, जबकि बीमारी बढ़ने या लंबे समय तक इलाज न होने पर ज्यादा साफ संकेत सामने आते हैं।
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शुरुआती लक्षण
- लगातार थकान: पूरा आराम करने के बाद भी सुस्ती और कमजोरी बनी रहती है।
- ठंड ज्यादा लगना: दूसरों को मौसम सामान्य लगता है, तब भी आपको ठंड लगती है।
- रूखी त्वचा: त्वचा सूखी और खुरदरी हो जाती है।
- कब्ज: आंतों की गति धीमी होने से मल त्याग कम और मुश्किल हो जाता है।
- धीरे-धीरे वजन बढ़ना: खानपान बदले बिना वजन बढ़ता है। यह बढ़ोतरी आमतौर पर 2 से 5 किलो के आसपास होती है और इसमें ज्यादातर शरीर में जमा पानी होता है, चर्बी नहीं। इससे कहीं ज्यादा वजन बढ़ा है तो दूसरे कारण भी देखने चाहिए।
- बाल झड़ना: बाल पतले, रूखे और बेजान हो जाते हैं।
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बीमारी बढ़ने पर दिखने वाले लक्षण
- धीमी धड़कन: दिल की गति सामान्य से कम हो जाती है।
- चेहरे और आंखों के आसपास सूजन: सुबह उठने पर चेहरा फूला हुआ दिखता है।
- आवाज भारी या घरघराती होना: बिना गले की खराबी के आवाज बदल जाती है।
- गर्दन में सूजन (घेंघा): थायरॉयड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है।
- याददाश्त और ध्यान की समस्या (Brain Fog): चीजें भूलना, ध्यान लगाने और साफ सोचने में परेशानी होना।
- मूड में बदलाव: उदासी, चिड़चिड़ापन या डिप्रेशन जैसा महसूस होना।
- मांसपेशियों में दर्द, अकड़न या कमजोरी।
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कम पहचाने जाने वाले संकेत
- भौंहों का बाहरी हिस्सा पतला होना: भौंह के बाहरी एक-तिहाई हिस्से के बाल झड़ जाते हैं।
- जरूरत से ज्यादा नींद: पूरी नींद के बाद भी दिन में बार-बार झपकी आना।
- हाथों में झुनझुनी: कलाई की नस दबने (कार्पल टनल सिंड्रोम) से उंगलियां सुन्न होना या झुनझुनी होना।
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ना: यह किसी को महसूस नहीं होता, पर लिपिड टेस्ट में LDL बढ़ा हुआ मिलता है। अक्सर इसी जांच से थायरॉयड की जांच की जरूरत सामने आती है।
हाइपोथायरायडिज्म के कारण क्या हैं? (Causes of Hypothyroidism)
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हाशिमोटो डिजीज (Hashimoto's Disease): एक ऑटोइम्यून बीमारी, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करती है। यह सबसे आम कारणों में से एक है।
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थायरॉयड की सर्जरी: ग्रंथि का कुछ या पूरा हिस्सा हटाने के बाद हार्मोन की कमी हो जाती है।
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रेडिएशन और रेडियोआयोडीन थेरेपी: गर्दन पर रेडिएशन या हाइपरथायरायडिज्म के इलाज में दी गई रेडियोआयोडीन थायरॉयड की कार्यक्षमता घटा सकती है।
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कुछ दवाएं: कुछ दवाएं थायरॉयड हार्मोन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।
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आयोडीन की कमी या अधिकता: शरीर में आयोडीन बहुत कम या बहुत ज्यादा होने से थायरॉयड गड़बड़ा सकता है।
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पिट्यूटरी या हाइपोथैलेमस की समस्या: इससे केंद्रीय हाइपोथायरायडिज्म होता है।
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जन्मजात कारण: कुछ बच्चों में थायरॉयड ग्रंथि जन्म से ही ठीक से काम नहीं करती।
हाइपोथायरायडिज्म के जोखिम कारण (Risk Factors)
कारण वह है जो बीमारी पैदा करता है, जबकि जोखिम कारक वे बातें हैं जिनसे इसकी संभावना बढ़ जाती है। इनमें से कोई भी आप पर लागू हो तो थायरॉयड की जांच के बारे में डॉक्टर से बात करें:
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महिला होना: महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों की तुलना में 5 से 8 गुना ज्यादा होती है।
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60 साल से ज्यादा उम्र।
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परिवार में थायरॉयड की बीमारी का इतिहास।
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दूसरी ऑटोइम्यून बीमारियां: जैसे टाइप 1 डायबिटीज और विटिलिगो (सफेद दाग)।
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प्रसव के बाद का समय (पोस्टपार्टम)।
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कुछ दवाएं: लिथियम (मानसिक रोगों में) या एमियोडेरोन (दिल की धड़कन की दवा) का लंबे समय तक सेवन।
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गर्दन की सर्जरी या रेडिएशन का इतिहास।
हाइपोथायरायडिज्म के प्रकार (Types of Hypothyroidism)
तीनों प्रकारों में लक्षण ऊपर बताई गई सूची से ही मिलते हैं। फर्क जांच की रिपोर्ट और कारण में होता है:
| प्रकार | क्या अलग हैं |
| प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म | सबसे आम प्रकार। थायरॉयड ग्रंथि खुद कम हार्मोन बनाती है। जांच में TSH ज्यादा और Free T4 कम आता है। |
| केंद्रीय हाइपोथायरायडिज्म | पिट्यूटरी ग्रंथि या हाइपोथैलेमस की गड़बड़ी से होता है। TSH कम या सामान्य आ सकता है, इसलिए इसमें Free T4 देखना जरूरी है। |
| सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म | TSH बढ़ा होता है, लेकिन Free T4 सामान्य रहता है। अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, कुछ लोगों को हल्की थकान रहती है। |
हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म में क्या अंतर है? (Hypothyroidism vs Hyperthyroidism)
दोनों थायरॉयड की स्थितियां हैं, लेकिन एक-दूसरे की उल्टी हैं। हाइपोथायरायडिज्म में हार्मोन कम होते हैं और शरीर धीमा पड़ जाता है, जबकि हाइपरथायरायडिज्म में हार्मोन ज्यादा होते हैं और शरीर तेज चलने लगता है
| अंतर | हाइपोथायरायडिज्म | हाइपरथायरायडिज्म |
| थायरॉयड हार्मोन | कम | ज्यादा |
| TSH (ब्लड टेस्ट) | आमतौर पर बढ़ा हुआ | आमतौर पर कम |
| वजन | बढ़ सकता है | कम हो सकता है |
| भूख | सामान्य या कम | बढ़ सकती है |
| तापमान | ठंड ज्यादा लगती है | गर्मी ज्यादा लगती है |
| दिल की धड़कन | धीमी हो सकती है | तेज या अनियमित हो सकती है |
| ऊर्जा | थकान और सुस्ती | बेचैनी और अधिक सक्रियता |
| पाचन | कब्ज | बार-बार मल त्याग या दस्त |
| त्वचा | रूखी और सूखी | गर्म और नम |
| मूड | उदासी या सुस्ती | घबराहट या चिड़चिड़ापन |
| नींद | ज्यादा नींद आ सकती है | नींद आने में परेशानी हो सकती है |
सिर्फ लक्षणों से इन दोनों में फर्क करना मुश्किल हो सकता है। सही स्थिति TSH और Free T4 ब्लड टेस्ट से ही तय होती है।
महिलाओं, गर्भावस्था और बच्चों में हाइपोथायरायडिज्म (Women, Pregnancy and Children)
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महिलाओं में
थायरॉयड की समस्या महिलाओं में पुरुषों से 5 से 8 गुना ज्यादा होती है। आम लक्षणों के अलावा यह पीरियड्स और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करती है:
- पीरियड्स अनियमित होना या ब्लीडिंग सामान्य से ज्यादा होना।
- भारी ब्लीडिंग से एनीमिया हो सकता है, जो थकान को और बढ़ा देता है।
- गर्भधारण में परेशानी।
- प्रसव के बाद थकान और मूड में बदलाव को अक्सर "डिलीवरी की कमजोरी" मान लिया जाता है, जबकि यह प्रसवोत्तर थायरॉयड गड़बड़ी भी हो सकती है।
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गर्भावस्था में
गर्भावस्था में हाइपोथायरायडिज्म का इलाज न होने पर गर्भपात, समय से पहले प्रसव और बच्चे के मस्तिष्क विकास पर असर का जोखिम रहता है। इसलिए:
- थकान और कब्ज गर्भावस्था में सामान्य भी हैं, इसलिए इन्हें देखकर अंदाजा न लगाएं। थायरॉयड की जांच करवाएं।
- पहले से दवा ले रही हैं तो गर्भ ठहरते ही डॉक्टर को बताएं। खुराक अक्सर बढ़ानी पड़ती है।
- हर ट्राइमेस्टर (तिमाही) में TSH का लक्ष्य अलग होता है, इसलिए जांच बीच-बीच में दोहराई जाती है।
- गर्भधारण की योजना बना रही हैं तो पहले थायरॉयड की जांच करवा लें।
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बच्चों और किशोरों में
बच्चों में हाइपोथायरायडिज्म लंबाई बढ़ने और किशोरावस्था के विकास को प्रभावित करता है। इन संकेतों पर ध्यान दें:
- उम्र के हिसाब से लंबाई का धीरे बढ़ना।
- थकान, कब्ज, ठंड ज्यादा लगना, रूखी त्वचा और वजन बढ़ना।
- किशोरावस्था में देरी (यौवन देर से शुरू होना)।
- गले में सूजन (घेंघा)।
- किशोरियों में पीरियड्स की समस्या।
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नवजात शिशुओं में (जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म)
जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म वाले कई नवजात शिशुओं में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता। जो लक्षण दिख सकते हैं, वे ये हैं:
- पीलिया का लंबे समय तक बना रहना।
- दूध पीने में कमजोरी।
- जीभ का बड़ा दिखना।
- कब्ज।
- नाभि के पास उभार (अम्बिलिकल हर्निया)।
हाइपोथायरायडिज्म के इलाज न होने पर जटिलताएं (Complications)
लंबे समय तक इलाज न हो तो ये समस्याएं हो सकती हैं:
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हृदय रोग और हाई कोलेस्ट्रॉल: LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और धड़कन धीमी होती है, जिससे दिल पर असर पड़ता है।
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बांझपन और गर्भावस्था की जटिलताएं: गर्भधारण में दिक्कत, गर्भपात और समय से पहले प्रसव का जोखिम।
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डिप्रेशन और याददाश्त की समस्या।
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घेंघा (Goitre): TSH के लगातार दबाव से थायरॉयड ग्रंथि बढ़ जाती है और गर्दन में सूजन दिखती है।
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मायक्सीडेमा कोमा: बहुत दुर्लभ लेकिन जानलेवा स्थिति (नीचे आपातकालीन संकेत देखें)।
सही इलाज से इनमें से ज्यादातर समस्याओं से बचा जा सकता है।
हाइपोथायरायडिज्म की जांच कैसे होती है? (How Is Hypothyroidism Diagnosed?)
सिर्फ लक्षणों से हाइपोथायरायडिज्म की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए ये जांचें की जाती हैं:
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मेडिकल हिस्ट्री: थकान, वजन में बदलाव, ठंड लगना, कब्ज, पीरियड्स में बदलाव और परिवार में थायरॉयड की बीमारी के बारे में पूछा जाता है।
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शारीरिक जांच: थायरॉयड ग्रंथि का आकार, त्वचा, बाल, दिल की धड़कन और सूजन देखी जाती है।
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TSH ब्लड टेस्ट: प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म में यही मुख्य पहला टेस्ट है। TSH की सामान्य रेंज लगभग 0.4 से 4.0 mIU/L मानी जाती है (लैब के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है)। इससे ऊपर का TSH हाइपोथायरायडिज्म का संकेत है।
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Free T4 (FT4) टेस्ट: शरीर में उपलब्ध T4 हार्मोन की मात्रा बताता है और बीमारी की गंभीरता समझने में मदद करता है।
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TPO एंटीबॉडी (TPOAb) टेस्ट: हाशिमोटो जैसी ऑटोइम्यून वजह की पहचान करता है।
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दूसरी जांचें: मिलते-जुलते लक्षणों की वजह से डॉक्टर हीमोग्लोबिन (एनीमिया), विटामिन B12, विटामिन D और लिपिड प्रोफाइल भी करवा सकते हैं।
केंद्रीय हाइपोथायरायडिज्म में सिर्फ TSH पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वहां TSH कम या सामान्य आ सकता है। इसमें Free T4 के साथ देखना जरूरी है।
हाइपोथायरायडिज्म का इलाज कैसे किया जाता है? (How Is Hypothyroidism Treated?)
ज्यादातर मामलों में शरीर में कम पड़ रहे हार्मोन की भरपाई के लिए लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine) दी जाती है।
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खुराक: डॉक्टर आपकी TSH और जरूरत पड़ने पर Free T4 रिपोर्ट, उम्र, वजन और गर्भावस्था को देखकर खुराक तय करते हैं।
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दोबारा जांच: इलाज शुरू करने या खुराक बदलने के लगभग 6 से 8 हफ्ते बाद TSH दोबारा जांचा जाता है। खुराक सही बैठ जाने के बाद आमतौर पर साल में एक बार जांच काफी होती है।
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कितने समय तक: ज्यादातर लोगों को लंबे समय तक, कई बार जीवनभर दवा लेनी पड़ती है। कुछ अस्थायी स्थितियों में (जैसे थायरॉयड में सूजन के बाद) थायरॉयड बाद में सामान्य हो जाता है, लेकिन यह डॉक्टर की जांच से ही तय होता है।
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सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म: इसमें आमतौर पर तब दवा शुरू की जाती है जब TSH 10 से ऊपर हो, या महिला गर्भवती हो या गर्भधारण की योजना बना रही हो। बाकी मामलों में अक्सर निगरानी की जाती है और समय-समय पर जांच दोहराई जाती है।
दवा खुद से बंद न करें और खुराक न बदलें। TSH सामान्य आने का मतलब यह है कि दवा काम कर रही है, बीमारी खत्म नहीं हुई।
थायरॉयड की दवा लेते समय किन बातों का ध्यान रखें? (Precautions While Taking Medicine)
लेवोथायरोक्सिन का असर इस पर निर्भर करता है कि शरीर उसे कितना सोखता है। इसलिए दवा लेने का तरीका उतना ही जरूरी है जितनी खुराक:
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खाली पेट लें: सुबह नाश्ते से 30 से 60 मिनट पहले, सादे पानी के साथ।
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चाय-कॉफी से दूर रखें: दवा के साथ या तुरंत बाद चाय या कॉफी न पिएं। सुबह की चाय के साथ दवा लेना भारतीय मरीजों में दवा के कम असर की एक आम वजह है। कम से कम 30 से 60 मिनट का अंतर रखें।
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कैल्शियम और आयरन से अंतर: कैल्शियम, आयरन के सप्लीमेंट और एंटासिड को दवा से लगभग 4 घंटे के अंतर पर लें।
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सोया से अंतर: सोया वाले खाद्य पदार्थ (सोया मिल्क, सोया चंक्स) दवा के समय के आसपास न खाएं। इन्हें कुछ घंटे के अंतर पर खा सकते हैं।
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रोज एक ही समय पर लें: समय और ब्रांड बार-बार न बदलें। ब्रांड बदलना पड़े तो डॉक्टर को बताएं, ताकि TSH दोबारा जांचा जा सके।
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नियमित जांच: डॉक्टर के बताए अंतराल पर TSH की जांच करवाते रहें।
हाइपोथायरायडिज्म में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? (Diet for Hypothyroidism)
हाइपोथायरायडिज्म में आमतौर पर किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। कोई भी खान-पान थायरॉयड को ठीक नहीं करता, इलाज दवा से ही होता है। संतुलित और पोषक आहार लेना इसमें सहायक है। भारतीय रसोई के सबसे आम सवालों के जवाब:
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क्या खाएं: दाल, सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन।
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नमक: घर में आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करें, लेकिन मात्रा सीमित रखें (दिनभर में लगभग एक छोटा चम्मच तक)। सेंधा नमक और काले नमक में आयोडीन बहुत कम होता है, इसलिए सिर्फ उन्हीं पर निर्भर न रहें।
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पत्ता गोभी, फूलगोभी और ब्रोकली: इनमें गॉइट्रोजन नाम के तत्व होते हैं, पर पकाकर सामान्य मात्रा में खाने से कोई दिक्कत नहीं होती। रोज बहुत सारा कच्चा सेवन (जूस या स्मूदी में) करने से बचें।
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सोया: खा सकते हैं, बस दवा के समय से कुछ घंटे दूर रखें।
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ग्लूटेन: आमतौर पर छोड़ने की जरूरत नहीं है। हाशिमोटो के मरीजों में सीलिएक बीमारी (गेहूं से एलर्जी जैसी ऑटोइम्यून स्थिति) थोड़ी ज्यादा पाई जाती है। पाचन की दिक्कत हो या दवा के बावजूद TSH काबू में न आ रहा हो, तो डॉक्टर से इसकी जांच के बारे में पूछें।
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सप्लीमेंट: आयोडीन की ज्यादा मात्रा वाले या kelp (समुद्री शैवाल) वाले सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
हाइपोथायरायडिज्म में कब तुरंत डॉक्टर से मिलें? (When to See a Doctor)
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जांच करवाने का सही समय थकान, ठंड लगना, कब्ज या वजन बढ़ने जैसे लक्षण कुछ हफ्तों से बने हुए हैं, या आपको ऊपर बताए जोखिम कारक लागू होते हैं, तो अपनी जांच के लिए डॉक्टर से मिलें और TSH टेस्ट करवाएं।
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आपातकालीन संकेत
बहुत गंभीर और लंबे समय से अनुपचारित हाइपोथायरायडिज्म में मायक्सीडेमा कोमा (Myxedema Coma) हो सकता है। यह दुर्लभ है, लेकिन जानलेवा है। इन लक्षणों में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा लें:
- शरीर का तापमान बहुत कम होना।
- सांस बहुत धीमी या उथली होना।
- ब्लड प्रेशर बहुत कम होना।
- गंभीर भ्रम या अत्यधिक सुस्ती।
- व्यक्ति को जगाना बहुत मुश्किल होना।
- बेहोशी या कोमा।
- अत्यधिक कमजोरी।
तुरंत क्या करें: घर पर इलाज की कोशिश न करें। नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग पहुंचें या आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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प्रश्न: TSH कितना होना चाहिए?
उत्तर: वयस्कों में TSH की सामान्य रेंज लगभग 0.4 से 4.0 mIU/L मानी जाती है, हालांकि यह लैब के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। इससे ऊपर का TSH हाइपोथायरायडिज्म का संकेत है। दवा लेने के दौरान आपका लक्ष्य डॉक्टर उम्र और स्थिति के हिसाब से तय करते हैं, और गर्भावस्था में यह लक्ष्य अलग होता है। -
प्रश्न: क्या थायराइड में वजन कम हो सकता है?
उत्तर: हाइपोथायरायडिज्म में वजन आमतौर पर बढ़ता है, घटता नहीं। बिना कोशिश वजन घटना, दिल की धड़कन तेज होना और पसीना ज्यादा आना हाइपरथायरायडिज्म के संकेत हैं। हाइपोथायरायडिज्म की दवा की खुराक जरूरत से ज्यादा हो जाए, तब भी वजन घट सकता है और धड़कन तेज हो सकती है। ऐसे में अपने डॉक्टर से मिलें। -
प्रश्न: थायराइड की दवा कब लेनी चाहिए?
उत्तर: लेवोथायरोक्सिन आमतौर पर सुबह खाली पेट, नाश्ते से 30 से 60 मिनट पहले सादे पानी के साथ ली जाती है। चाय-कॉफी और कैल्शियम या आयरन के सप्लीमेंट से इसका अंतर रखें। डॉक्टर ने अलग समय बताया हो तो उसी का पालन करें।
