कोरोनरी धमनी क्या है और क्या काम करती है? (Coronary Artery Meaning in Hindi)
कोरोनरी धमनियां (Coronary Artery) वे रक्त वाहिकाएं हैं जो दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन वाला खून पहुंचाती हैं। "Coronary" शब्द लैटिन के corona (यानी मुकुट) से आया है, क्योंकि ये धमनियां मुकुट की तरह दिल को घेरे रहती हैं। हिंदी में इनका मतलब है "दिल से जुड़ी धमनियां"। दिल में दो मुख्य कोरोनरी धमनियां (दाईं और बाईं) होती हैं, जो आगे कई शाखाओं में बंटकर पूरे दिल को खून देती हैं।
इन्हीं धमनियों से दिल को हर धड़कन की ताकत मिलती है, चाहे आप आराम कर रहे हों या मेहनत। इसी से दिल पूरे शरीर में खून पंप कर पाता है।
कोरोनरी धमनी रोग (CAD) क्या है? (CAD Meaning in Hindi)
CAD का पूरा नाम Coronary Artery Disease है। इसमें कोरोनरी धमनियों की दीवारों पर चर्बी, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम की परत (प्लाक) जमने लगती है। इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे धमनी पतली और सख्त हो जाती है और दिल तक पूरा खून नहीं पहुंच पाता। इसी बीमारी को कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) या इस्केमिक हार्ट डिजीज (IHD) भी कहा जाता है।
आम बोलचाल में इसे "हार्ट ब्लॉकेज" कहा जाता है। लेकिन ध्यान रखें कि मेडिकल भाषा में "हार्ट ब्लॉक" एक अलग स्थिति है, जिसमें रुकावट धमनी में नहीं, बल्कि दिल की बिजली के संकेतों में होती है (आगे तुलना वाली तालिका देखें)।
कोरोनरी धमनी रोग के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of CAD)
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सीने में भारीपन, दबाव या जकड़न: ऐसा लगता है जैसे सीने पर कोई बोझ रखा हो। यह आमतौर पर कुछ मिनट (5 से 10 मिनट) रहता है और आराम करने से कम हो जाता है।
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सांस फूलना: सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा चलने पर भी सांस फूलने लगती है।
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जल्दी थक जाना: पहले जितना काम करने की ताकत नहीं रहती।
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दर्द का फैलना: सीने से बांह (अक्सर बाईं), कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से तक।
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मेहनत में चक्कर आना: काम या चलने के दौरान चक्कर या सिर हल्का लगना।
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मेहनत या तनाव में बढ़ना, आराम में कम होना: मेहनत, तनाव, भारी खाने के बाद या ठंड में लक्षण बढ़ना और आराम से कम होना स्थिर एनजाइना (Stable Angina) कहलाता है।
कोरोनरी धमनी रोग के लक्षण क्यों होते हैं?
दिल को ठीक से काम करने के लिए लगातार खून चाहिए। जब धमनी में प्लाक जमने से रास्ता तंग हो जाता है, तो आराम के समय तो काम चल जाता है। लेकिन मेहनत या तनाव में दिल को ज्यादा खून चाहिए और वह मिल नहीं पाता। तब सीने में दर्द या भारीपन होता है, जिसे एनजाइना कहते हैं।
धमनी बंद होने पर क्या होता है? आंशिक रुकावट में सीने का दर्द, सांस फूलना और थकान होती है। लेकिन अगर प्लाक फट जाए तो उस जगह खून का थक्का (क्लॉट) बन जाता है और धमनी अचानक पूरी बंद हो सकती है। तब दिल की मांसपेशी को खून मिलना बंद हो जाता है और हार्ट अटैक आता है। यह जानलेवा हो सकता है।
लक्षण दिखें तो क्या करें?
सीने की तकलीफ हर बार एक जैसी गंभीर नहीं होती। लक्षणों की गंभीरता के हिसाब से ये कदम उठाएं:
| स्तर | कौन से लक्षण | क्या करें |
| कुछ दिनों में डॉक्टर से मिलें | व्यायाम या चढ़ाई में सीने में तकलीफ जो आराम से चली जाती है। रोज के कामों में सांस फूलना। थकान और ताकत में कमी। | हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें और जांच कराएं। |
| उसी दिन डॉक्टर या अस्पताल जाएं | सीने की तकलीफ पहले से ज्यादा बार या कम मेहनत में आना। दवा लेने के बावजूद लक्षण बढ़ना। मेहनत में बार-बार चक्कर आना। | इंतजार न करें। यह बीमारी के बढ़ने का संकेत हो सकता है। |
| तुरंत इमरजेंसी | आराम में भी सीने में दर्द। आराम या दवा के बाद भी दर्द का न जाना। नीचे बताए इमरजेंसी लक्षण। | एम्बुलेंस बुलाएं (108 या 112)। नीचे दिए कदम अपनाएं। |
गैस या एसिडिटी का दर्द और दिल का दर्द: फर्क कैसे पहचानें?
भारत में सीने का दर्द अक्सर "गैस होगी" कहकर टाल दिया जाता है। दोनों में कुछ फर्क होता है:
| संकेत | दिल का दर्द (एनजाइना / हार्ट अटैक) | गैस या एसिडिटी |
| कब होता है | चलने, मेहनत या तनाव में। आराम से कम होता है। | खाने के बाद, लेटने या झुकने पर बढ़ता है। |
| कैसा लगता है | दबाव, भारीपन, जकड़न। | जलन, खट्टी डकार, पेट में भारीपन। |
| कहां फैलता है | बांह, कंधे, जबड़े, पीठ तक। | आमतौर पर सीने के बीच या गले तक की जलन। |
| साथ में | सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, घबराहट। | डकार, पेट फूलना, गैस निकलना। |
| एंटासिड से | आमतौर पर आराम नहीं मिलता। | अक्सर आराम मिल जाता है। |
कब तुरंत अस्पताल जाएं? (इमरजेंसी लक्षण)
इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो देर न करें, तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं (भारत में 108 या 112) या नजदीकी अस्पताल पहुंचें:
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सीने में तेज भारीपन, दबाव या जकड़न जो 5 मिनट से ज्यादा रहे, बार-बार लौटे या बढ़ता जाए।
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आराम में भी सीने का तेज दर्द, या आराम और दवा के बाद भी दर्द का न जाना।
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दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैलना।
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सीने के दर्द के साथ सांस लेने में बहुत तकलीफ।
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अचानक ठंडा पसीना, ठंडी और चिपचिपी त्वचा।
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सीने की तकलीफ के साथ उल्टी, मतली या बहुत घबराहट।
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अचानक बहुत कमजोरी, चक्कर, सिर हल्का लगना या भ्रम की स्थिति।
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धड़कन का बहुत तेज या बेकाबू हो जाना।
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बेहोश हो जाना, प्रतिक्रिया न देना या सामान्य सांस न लेना।
इंतजार के दौरान क्या करें
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एम्बुलेंस बुलाएं: 108 या 112 पर कॉल करें। खुद गाड़ी न चलाएं और पैदल न चलें।
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आराम की मुद्रा: आराम से बैठ जाएं या लेट जाएं और कपड़े ढीले करें।
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एस्पिरिन: अगर आपको एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है, शरीर में ब्लीडिंग की समस्या नहीं है और डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो एस्पिरिन की एक गोली (आमतौर पर 300 से 325 mg) चबाकर निगल लें। एम्बुलेंस ऑपरेटर की सलाह हो तो उसी का पालन करें।
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सॉर्बिट्रेट: अगर डॉक्टर ने आपको पहले से सॉर्बिट्रेट (जीभ के नीचे रखने वाली गोली) लिखी है, तो उसे जीभ के नीचे रखें। ब्लड प्रेशर बहुत कम हो, या पिछले 1 से 2 दिन में सिल्डेनाफिल जैसी दवा ली हो, तो इसे न लें।
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समय नोट करें: लक्षण कब शुरू हुए, यह याद रखें और डॉक्टर को बताएं। जल्दी इलाज से दिल की मांसपेशी बच सकती है।
अगर व्यक्ति बेहोश हो जाए और सामान्य सांस न ले
यह कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। तुरंत 108 या 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें: व्यक्ति को सख्त सतह पर पीठ के बल लिटाएं, सीने के बीच में दोनों हाथ रखकर तेज और जोर से दबाएं (लगभग 5 सेमी गहरा, प्रति मिनट 100 से 120 बार)। रुकें नहीं, जब तक एम्बुलेंस न आ जाए। पास में AED मशीन हो तो उसके निर्देशों का पालन करें।
महिओं में कोरोनरी धमनी रोग के लक्षण
महिलाओं में लक्षण कई बार पुरुषों से अलग और कम साफ होते हैं, इसलिए अक्सर पहचान में नहीं आते। सीने का दर्द फिर भी सबसे आम लक्षण है, लेकिन इनके साथ या इनके बिना ये संकेत भी दिख सकते हैं:
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सीने में दबाव, जकड़न या बेचैनी।
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सांस लेने में कठिनाई।
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असामान्य थकान या कमजोरी।
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मतली या उल्टी, चक्कर आना, पसीना आना।
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पीठ के ऊपरी हिस्से में बेचैनी।
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बांह, कंधे, गर्दन या जबड़े में दर्द।
कोरोनरी धमनी रोग के कारण और जोखिम कारक (Causes and Risk Factors)
CAD का मुख्य कारण धमनियों में प्लाक जमना (एथेरोस्क्लेरोसिस) है। इसकी संभावना इन बातों से बढ़ती है:
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कोलेस्ट्रॉल की गड़बड़ी: LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल ज्यादा, HDL (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल कम और ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा होना। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और प्री-डायबिटीज।
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तंबाकू: सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और गुटखा या खैनी जैसे चबाने वाले तंबाकू।
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मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि: खासकर पेट के आसपास की चर्बी।
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परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी: पिता या भाई में 55 साल से पहले, या मां या बहन में 65 साल से पहले।
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उम्र बढ़ना: महिलाओं में मेनोपॉज के बाद जोखिम बढ़ जाता है। लंबे समय का तनाव और कम नींद।
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स्लीप एपनिया: तेज खर्राटे और नींद में सांस रुकना। किडनी की पुरानी बीमारी, वायु प्रदूषण।
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महिलाओं में गर्भावस्था की जटिलताएं: प्री-एक्लेम्पसिया (गर्भावस्था में हाई BP) और गर्भावस्था की डायबिटीज।
कोरोनरी धमनी रोग के प्रकार और उनके लक्षण (Types of CAD)
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क्रॉनिक कोरोनरी सिंड्रोम: मेहनत या तनाव में सीने में दबाव, सांस फूलना और जल्दी थकान। आराम या दवा से राहत मिलती है।
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गैर-अवरोधक CAD: मुख्य धमनियों में बड़ी रुकावट नहीं होती, फिर भी सीने में बेचैनी और मेहनत में सांस फूलना हो सकता है। कुछ लोगों में लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं होते।
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एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS): अचानक या बढ़ता हुआ सीने का दर्द, साथ में पसीना, मतली, चक्कर या कमजोरी। यह इमरजेंसी है। इसके तीन रूप हैं:
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अस्थिर एनजाइना: आराम में भी दर्द होना, या दर्द का तेजी से बढ़ना।
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NSTEMI: हार्ट अटैक का एक रूप, जिसमें दिल की मांसपेशी को नुकसान होता है।
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STEMI: धमनी के पूरी तरह बंद होने से होने वाला हार्ट अटैक। यह सबसे गंभीर रूप है और ECG में साफ बदलाव दिखते हैं।
इनसे जुड़ी दूसरी स्थितियां
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माइक्रोवास्कुलर एनजाइना: बारीक धमनियों की खराबी से काम करते समय या आराम में भी सीने में दर्द। यह दर्द आम एनजाइना से ज्यादा देर टिकता है।
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वासोस्पास्टिक एनजाइना: धमनी में अचानक ऐंठन से आराम के समय, खासकर रात या सुबह, तेज दर्द।
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साइलेंट मायोकार्डियल इस्केमिया: दिल तक खून कम पहुंचता है, पर दर्द महसूस नहीं होता। यह डायबिटीज वाले मरीजों और बुजुर्गों में ज्यादा होता है और सिर्फ जांच से पता चलता है।
हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट फेल्योर और हार्ट ब्लॉक में फर्क
ये चारों शब्द अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल हो जाते हैं, जबकि ये चार अलग स्थितियां हैं:
| स्थिति | क्या होता है |
| हार्ट अटैक | कोरोनरी धमनी में रुकावट से दिल की मांसपेशी को खून नहीं मिलता। दिल आमतौर पर चलता रहता है, पर मांसपेशी को नुकसान होने लगता है। तुरंत एंजियोप्लास्टी या दवा से रुकावट खोलनी होती है। |
| कार्डियक अरेस्ट | दिल की बिजली की गड़बड़ी से दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। व्यक्ति बेहोश हो जाता है और सांस नहीं लेता। तुरंत CPR और AED चाहिए। हार्ट अटैक इसकी एक वजह बन सकता है। |
| हार्ट फेल्योर | दिल की पंप करने की ताकत कमजोर हो जाती है। सांस फूलना और पैरों में सूजन होती है। इसका मतलब यह नहीं कि दिल बंद हो गया है। |
| हार्ट ब्लॉक | दिल की बिजली के संकेत धीमे पड़ते हैं या रुक जाते हैं। धड़कन धीमी होती है और चक्कर आते हैं। कई बार पेसमेकर की जरूरत पड़ती है। यह धमनी की रुकावट (CAD) से अलग है। |
कोरोनरी धमनी रोग की जटिलताएं (Complications)
इलाज न होने या लापरवाही करने पर ये समस्याएं हो सकती हैं:
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हार्ट अटैक
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हार्ट फेल्योर: बार-बार खून की कमी और मांसपेशी को नुकसान से दिल कमजोर हो जाता है
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धड़कन की गड़बड़ी (अरिद्मिया)
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अचानक कार्डियक अरेस्ट
सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से इनका जोखिम काफी घटाया जा सकता है।
कोरोनरी धमनी रोग की जांच कैसे होती है? (Diagnosis)
| जांच | क्या पता चलता है |
| मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच | लक्षण, परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास, BP, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और धूम्रपान की आदत के बारे में जानकारी। |
| ECG | दिल की धड़कन और उसकी बिजली की गतिविधि में गड़बड़ी या हार्ट अटैक के संकेत पता चलते हैं। आराम के समय किया गया ECG कभी-कभी ब्लॉकेज होने पर भी सामान्य आ सकता है। |
| ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट | दिल की मांसपेशी को नुकसान होने पर खून में बढ़ने वाले प्रोटीन का पता चलता है। हार्ट अटैक की जांच में इसका इस्तेमाल किया जाता है। |
| लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर | कोलेस्ट्रॉल (LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड्स) और ब्लड शुगर की जांच से दिल की बीमारी के जोखिम का पता लगाने में मदद मिलती है। |
| इकोकार्डियोग्राम | अल्ट्रासाउंड की मदद से दिल की बनावट और उसके पंप करने की क्षमता की जांच की जाती है। |
| स्ट्रेस टेस्ट (TMT) | ट्रेडमिल पर चलाकर देखा जाता है कि मेहनत के दौरान दिल तक पर्याप्त खून पहुंच रहा है या नहीं। |
| कोरोनरी CT एंजियोग्राफी (CCTA) | नस में डाई डालकर CT स्कैन से दिल की धमनियों में जमा चर्बी और रुकावट देखी जाती है। इसमें चीर-फाड़ नहीं होती। |
| इनवेसिव एंजियोग्राफी | कैथेटर की मदद से दिल की धमनियों की सीधे जांच की जाती है। रुकावट मिलने पर उसी समय स्टेंट भी डाला जा सकता है। |
| कोरोनरी फंक्शनल टेस्ट (CFT) | जब बड़ी धमनियों में रुकावट न हो, लेकिन सीने में दर्द बना रहे, तब दिल की छोटी धमनियों में समस्या का पता लगाने के लिए यह जांच की जा सकती है। |
कौन सी जांच कब: आमतौर पर पहले ECG और खून की जांच होती है, फिर जरूरत के अनुसार इकोकार्डियोग्राम, TMT या CT एंजियोग्राफी, और रुकावट की पुष्टि या इलाज के लिए एंजियोग्राफी। ध्यान रखें कि सामान्य ECG या TMT का मतलब "बीमारी नहीं है" नहीं होता। लक्षण बने रहें तो डॉक्टर आगे की जांच कराते हैं।
नियमित जांच: कोलेस्ट्रॉल, BP और शुगर की जांच साल में एक बार कराएं (जोखिम कारक हों तो डॉक्टर के बताए अंतराल पर)। ECG और TMT जैसी जांचें सबको नियमित रूप से नहीं, बल्कि लक्षण होने पर या ज्यादा जोखिम में डॉक्टर की सलाह से कराई जाती हैं।
कोरोनरी धमनी रोग का इलाज (Treatment of CAD)
इलाज इस पर निर्भर करता है कि रुकावट कितनी है, कहां है और आपके लक्षण क्या हैं। डॉक्टर आमतौर पर इनमें से चुनते हैं:
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जीवनशैली में बदलाव सेहतमंद खान-पान, व्यायाम, तंबाकू बंद करना और वजन नियंत्रण। यह हर मरीज के इलाज का आधार है।
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दवाइयां
ये आमतौर पर जीवनभर चलती हैं।
- स्टैटिन: कोलेस्ट्रॉल घटाती हैं और प्लाक को स्थिर रखती हैं।
- एस्पिरिन / क्लोपिडोग्रेल (एंटीप्लेटलेट): खून में थक्का बनने से रोकती हैं। इन्हें आम भाषा में "खून पतला करने की दवा" कहा जाता है।
- बीटा-ब्लॉकर: धड़कन धीमी करके दिल का बोझ घटाते हैं।
- नाइट्रेट (जैसे सॉर्बिट्रेट): दर्द के समय धमनी को चौड़ा करके राहत देते हैं। साथ में BP और शुगर की दवाएं भी चल सकती हैं।
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एंजियोप्लास्टी और स्टेंट बंद या तंग धमनी को बैलून से खोलकर स्टेंट (जाली जैसी नली) लगाया जाता है। स्टेंट के बाद एंटीप्लेटलेट दवा डॉक्टर की सलाह के बिना कभी बंद न करें, क्योंकि स्टेंट में क्लॉट बनने का खतरा रहता है।
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बाईपास सर्जरी (CABG) कई धमनियों में बड़ी रुकावट हो, मुख्य बाईं धमनी (Left Main) में रुकावट हो, डायबिटीज हो या दिल की पंप करने की ताकत कम हो, तब खून के लिए नया रास्ता बनाया जाता है।
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कार्डियक रिहैबिलिटेशन दिल के मरीजों के लिए निगरानी में व्यायाम, खान-पान की सलाह और तनाव प्रबंधन का कार्यक्रम। हार्ट अटैक, स्टेंट या बाईपास के बाद यह रिकवरी में मदद करता है।
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इलाज के लक्ष्य हाई-रिस्क मरीजों में डॉक्टर आमतौर पर LDL कोलेस्ट्रॉल 70 mg/dL से नीचे और BP 130/80 से नीचे रखने का लक्ष्य रखते हैं। आपका लक्ष्य डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार तय करेंगे।
कोरोनरी धमनी रोग में व्यायाम
नियमित हल्का व्यायाम दिल के लिए फायदेमंद है, जैसे तेज चलना, हल्की साइकिलिंग और योग। सामान्य लक्ष्य हफ्ते में लगभग 150 मिनट का मध्यम व्यायाम है (यानी 5 दिन, रोज 30 मिनट)।
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व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए कितना सही है।
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धीरे-धीरे शुरू करें, वार्म-अप करें और मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।
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भारी खाने के तुरंत बाद, बहुत ठंड, गर्मी या प्रदूषण में व्यायाम न करें।
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बिना जांच के अचानक जिम में भारी वजन उठाने या बहुत तेज कसरत शुरू न करें।
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व्यायाम के दौरान सीने में दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुकें और डॉक्टर को बताएं।
कोरोनरी धमनी की बीमारी से बचाव और खान-पान
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खान-पान: फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और मेवे (नट्स) ज्यादा खाएं। समोसा, पकौड़े जैसी तली चीजें, रिफाइंड तेल की ज्यादा मात्रा, वनस्पति (डालडा) और बेकरी के सामान (ट्रांस फैट) कम करें। अचार, पापड़ और नमकीन से नमक की मात्रा ज्यादा न होने दें।
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शारीरिक गतिविधि: रोज कम से कम 30 मिनट चलें या व्यायाम करें।
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तंबाकू: सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और गुटखा-खैनी पूरी तरह छोड़ें।
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नियमित जांच: BP, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें।
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वजन और कमर: वजन नियंत्रित रखें। भारतीयों में कमर का माप पुरुषों में 90 सेमी और महिलाओं में 80 सेमी से कम रखना अच्छा माना जाता है।
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तनाव और नींद: तनाव कम करें और रोज 7 से 8 घंटे की नींद लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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प्रश्न: पैंक्रियास में इन्फेक्शन कैसे होता है?
उत्तर: पैंक्रियास में इन्फेक्शन गंभीर पैंक्रियाटाइटिस के कारण हो सकता है। पैंक्रियास के आसपास जमा द्रव या खराब हो चुके टिशू में बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसके अलावा कुछ वायरल या परजीवी संक्रमण भी पैंक्रियाटाइटिस का कारण बन सकते हैं। -
प्रश्न: पैंक्रियास की समस्याओं के 7 लक्षण क्या हैं?
उत्तर: पैंक्रियास की समस्याओं में ऊपरी पेट में दर्द, पीठ तक फैलता दर्द, मतली, उल्टी, बुखार, पेट में सूजन या छूने पर दर्द, तेजी से धड़कता दिल और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय की समस्या में दस्त और तैलीय मल भी हो सकता है। -
प्रश्न: अग्नाशय कैंसर का मेरा पहला लक्षण क्या है?
उत्तर: अग्नाशय कैंसर का कोई एक निश्चित शुरुआती लक्षण नहीं होता और शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता। बीमारी बढ़ने पर पीलिया, पेट या पीठ में दर्द, बिना कारण वजन कम होना, भूख कम लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
