चिकनपॉक्स क्यों होता है और कैसे फैलता है?
चिकनपॉक्स वैरिसेला-जोस्टर वायरस (Varicella-Zoster Virus) के कारण होता है। जिन लोगों को पहले चिकनपॉक्स नहीं हुआ है या जिन्होंने इसका टीका नहीं लगवाया है, उनमें संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
चिकनपॉक्स कैसे फैलता है?
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खांसी-छींक की बूंदों से: संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने पर निकली बूंदों से वायरस हवा में फैल सकता है।
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छालों के संपर्क से: छालों के तरल पदार्थ को छूने से संक्रमण हो सकता है।
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साझा चीजों से: तौलिया, चादर, कपड़े और बर्तन साझा करने से भी वायरस फैल सकता है।
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गर्भवती मां से शिशु तक: गर्भावस्था या प्रसव के आसपास संक्रमण होने पर वायरस शिशु तक पहुंच सकता है।
चिकनपॉक्स कब तक संक्रामक रहता है?
व्यक्ति दाने निकलने से 1 से 2 दिन पहले से लेकर तब तक संक्रामक रह सकता है, जब तक सभी छालों पर पपड़ी न बन जाए। आमतौर पर यह दाने निकलने के करीब 5 से 7 दिन बाद तक होता है। यानी व्यक्ति को पता चलने से पहले ही वह दूसरों को संक्रमित कर सकता है, इसीलिए यह स्कूलों और परिवारों में तेजी से फैलता है।
किन लोगों में खतरा अधिक होता है?
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जिन्हें पहले चिकनपॉक्स नहीं हुआ और टीका भी नहीं लगा है।
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गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु।
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कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, जैसे कैंसर का इलाज करा रहे, अंग प्रत्यारोपण वाले, HIV से पीड़ित या लंबे समय से स्टेरॉयड लेने वाले।
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गंभीर अस्थमा या त्वचा की पुरानी समस्या वाले लोग।
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संक्रमित व्यक्ति के साथ रहने वाले परिवार के सदस्य।
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किशोर और वयस्क, जिनमें बीमारी अक्सर बच्चों से ज्यादा गंभीर हो सकती है।
चिकनपॉक्स के लक्षण और चरण
चिकनपॉक्स के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 10 से 21 दिन बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में बुखार, थकान और सिरदर्द हो सकता है, फिर 1 से 2 दिन में दाने निकलते हैं।
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लाल दाने और पानी वाले छाले: आमतौर पर चेहरे, छाती और पीठ से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल सकते हैं। पलकों, मुंह के अंदर और गुप्तांगों के आसपास भी दाने हो सकते हैं।
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खुजली: छालों के आसपास तेज खुजली और जलन।
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बुखार: अधिकतर हल्का से मध्यम बुखार।
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थकान, कमजोरी और बदन दर्द।
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सिरदर्द और भूख कम लगना।
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मुंह और गले में छाले: खाने-पीने में परेशानी हो सकती है।
चिकनपॉक्स और खसरा (Measles) दोनों में त्वचा पर दाने निकल सकते हैं, लेकिन इनके कारण और लक्षण अलग होते हैं। सही पहचान के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
चिकनपॉक्स के तीन चरण (Stages of Chicken Pox)
| चिकनपॉक्स में दाने के चरण | त्वचा पर क्या बदलाव दिखाई देते हैं? |
| लाल चपटे धब्बे (मैक्यूल्स) | शुरुआत में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल धब्बे दिखाई देते हैं, जो चपटे होते हैं। |
| उभरे दाने और पानी से भरे छाले (पैपुल्स और वेसिकल्स) | धीरे-धीरे लाल धब्बे उभरे हुए दानों में बदल जाते हैं। फिर इनमें पानी भर जाता है और तेज खुजली हो सकती है। |
| छालों का सूखना और पपड़ी बनना | कुछ दिनों बाद छाले सूखने लगते हैं और उन पर पपड़ी जम जाती है। पपड़ी धीरे-धीरे अपने आप झड़ जाती है और त्वचा ठीक होने लगती है। |
नए दाने कई दिनों तक निकलते रहते हैं, इसलिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर ये तीनों चरण एक ही समय में दिख सकते हैं।
चिकनपॉक्स कितने दिन तक रहता है?
अधिकतर मामलों में बीमारी लगभग 1 से 2 सप्ताह में ठीक होने लगती है। छालों को सूखकर पपड़ी बनने में करीब एक सप्ताह लग सकता है, लेकिन त्वचा के निशान हल्के होने में अधिक समय लग सकता है। जब तक सभी छालों पर पपड़ी नहीं बन जाती, तब तक स्कूल, ऑफिस और दूसरे लोगों के नजदीकी संपर्क से बचना जरूरी है।
छोटी माता और बड़ी माता (चेचक) में अंतर
बोलचाल में दोनों नाम मिल जाते हैं, इसलिए अंतर जानना जरूरी है।
| बिंदु | छोटी माता (चिकनपॉक्स) | बड़ी माता (चेचक / Smallpox) |
| कारण | वैरिसेला-जोस्टर वायरस | वेरियोला वायरस |
| स्थिति | आम संक्रमण, टीके से रोकथाम संभव | WHO ने 1980 में इसे दुनिया से समाप्त घोषित किया |
| गंभीरता | अधिकतर हल्की, पर कुछ लोगों में जटिलताएं संभव | बहुत गंभीर और जानलेवा थी |
| दाने | अलग-अलग चरण के दाने एक साथ दिखते हैं | सभी दाने अक्सर एक ही चरण में होते थे |
चिकनपॉक्स के घरेलू उपाय
चिकनपॉक्स के दौरान त्वचा में खुजली, जलन और बुखार से परेशानी हो सकती है। कुछ आसान घरेलू उपाय इन लक्षणों से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
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नीम के पत्तों का इस्तेमाल (Neem Leaves)
- नीम का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है, लेकिन चिकनपॉक्स के छालों को ठीक करने में इसके लाभ के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
- छालों पर नीम का पेस्ट लगाने के बजाय त्वचा को साफ रखें और सादे पानी से नहाएं।
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ठंडे पानी से सिकाई (Cold Compress)
- एक साफ, मुलायम कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर खुजली वाली जगह पर हल्के हाथों से रखें।
- इससे त्वचा की खुजली और जलन से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है।
- छालों को रगड़ने, खुजलाने या फोड़ने से बचें।
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ओटमील बाथ लें (Oatmeal Bath)
- नहाने के पानी में कोलॉइडल ओटमील यानी बारीक पिसे हुए ओट्स मिलाने से खुजली वाली त्वचा को आराम मिल सकता है।
- नहाने के लिए बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल न करें।
- नहाने के बाद त्वचा को साफ, मुलायम तौलिए से थपथपाकर सुखाएं।
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पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिएं (Stay Hydrated)
- बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए नियमित रूप से पानी पीते रहें।
- नारियल पानी और सूप जैसे तरल पदार्थ भी ले सकते हैं।
- यदि मुंह में छाले हों, तो ऐसे पेय और नरम खाद्य पदार्थ चुनें जिन्हें निगलने में दर्द न हो।
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त्वचा को साफ और ठंडा रखें (Keep Skin Clean and Cool)
- ढीले और सूती कपड़े पहनें, ताकि त्वचा पर घर्षण कम हो।
- नाखून छोटे रखें और छालों को खुजलाने से बचें।
- त्वचा को साफ रखें और तौलिए या कपड़े दूसरे लोगों के साथ साझा न करें।
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ठंडे पानी से सिकाई करें
खुजली और जलन कम करने के लिए साफ कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर, निचोड़कर प्रभावित जगह पर हल्के हाथ से रखें। इससे त्वचा को कुछ समय के लिए आराम मिल सकता है। हर बार साफ कपड़े का इस्तेमाल करें और छालों को रगड़ें नहीं।
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गुनगुने या ठंडे पानी से नहाएं
कई घरों में माना जाता है कि माता निकलने पर नहाना नहीं चाहिए, जबकि चिकनपॉक्स में साफ-सफाई जरूरी है। गुनगुने या आरामदायक ठंडे पानी से नहाने पर त्वचा को राहत मिल सकती है और छालों में संक्रमण का खतरा कम होता है। हल्के, बिना सुगंध वाले साबुन का इस्तेमाल करें और नहाने के बाद मुलायम तौलिए से त्वचा को थपथपाकर सुखाएं।
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ओटमील बाथ से त्वचा को आराम दें
सादे, कोलॉइडल ओटमील (बारीक पिसे हुए ओट्स) को गुनगुने नहाने के पानी में मिलाकर 15 से 20 मिनट भीगने से खुजली वाली त्वचा को आराम मिल सकता है। पानी बहुत गर्म न हो।
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खुजली से राहत के लिए कैलामाइन लोशन
कैलामाइन लोशन कुछ लोगों में खुजली कम करने में मदद कर सकता है। इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सही तरीका पूछें। खुले छालों, आंखों या मुंह के आसपास इसे बिना चिकित्सकीय सलाह के न लगाएं। खुजली ज्यादा हो तो डॉक्टर एंटीहिस्टामिन दवा भी सुझा सकते हैं।
जरूरी बात: नीम का पेस्ट, शहद, बेकिंग सोडा, सिरका, काली मिर्च या विटामिन ई का तेल सीधे छालों पर लगाने या इनसे इलाज का दावा करने वाले नुस्खों से बचें। इनसे त्वचा में जलन हो सकती है या इनके लाभ के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर को दिखाएं। घरेलू उपाय संक्रमण का इलाज नहीं करते।
चिकनपॉक्स में रोजमर्रा की देखभाल और जरूरी बातें
चिकनपॉक्स में केवल खुजली कम करना ही नहीं, बल्कि त्वचा को संक्रमण से बचाना, शरीर को आराम देना और दूसरों तक संक्रमण फैलने से रोकना भी जरूरी है।
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खुजली और संक्रमण से बचाव के आसान तरीके
- नाखून छोटे रखें: खुजलाने से छाले फूट सकते हैं और त्वचा पर निशान या जीवाणु संक्रमण हो सकता है। छोटे बच्चों को सोते समय सूती दस्ताने या साफ मोजे पहनाए जा सकते हैं।
- ढीले सूती कपड़े पहनाएं: तंग या सिंथेटिक कपड़े जलन और खुजली बढ़ा सकते हैं।
- कमरा हवादार और ठंडा रखें: गर्मी और पसीने से खुजली बढ़ सकती है।
- बिस्तर और सामान अलग रखें: मरीज के कपड़े, तौलिए, चादर और बर्तन अलग रखें। कपड़ों को साबुन और गर्म पानी से धोकर धूप में सुखाएं।
- आराम करें: शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए पर्याप्त आराम की जरूरत होती है।
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बुखार और दर्द में क्या लें?
बुखार या बदन दर्द में आमतौर पर पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) दी जाती है। बच्चों में इसकी खुराक उनके वजन और दवा के रूप (सिरप, ड्रॉप या टैबलेट) पर निर्भर करती है, इसलिए डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछकर ही दें। बच्चों और किशोरों को एस्पिरिन बिल्कुल न दें।
चिकनपॉक्स में क्या खाना चाहिए?
बीमारी के दौरान ऐसा खाना चुनें जिसे आसानी से खाया और पचाया जा सके।
| खाने की चीज | कैसे मदद कर सकती है |
| दाल और मूंग की खिचड़ी | शरीर को ऊर्जा और प्रोटीन देने में मदद करती है। |
| दलिया, सूजी और नरम चावल | खाने और पचाने में आसान होते हैं। |
| उबली सब्जियां और हल्का सब्जी का सूप | पोषक तत्व देते हैं और निगलने में आसान होते हैं। |
| दही या छाछ, यदि खाने से परेशानी न हो | प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व प्रदान करता है। |
| केला, सेब और अन्य नरम फल | ऊर्जा और पोषक तत्व देते हैं। |
| पानी, सूप और नारियल पानी | शरीर में पानी की कमी से बचाने में मदद करते हैं। |
यदि मुंह में छाले हों, तो बहुत तीखा, खट्टा, नमकीन या गर्म खाना परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में नरम, ठंडा और कम मसाले वाला भोजन लें। भूख कम होने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खाएं।
चिकनपॉक्स में दर्द कहां हो सकता है?
चिकनपॉक्स के दौरान शरीर के अलग-अलग हिस्सों में परेशानी हो सकती है।
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त्वचा पर: छालों के आसपास खुजली, जलन और कभी-कभी दर्द हो सकता है।
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सिर में: सिरदर्द और भारीपन महसूस हो सकता है।
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शरीर और मांसपेशियों में: बुखार के साथ बदन दर्द और कमजोरी हो सकती है।
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मुंह और गले में: छाले होने पर निगलने या खाना खाने में दर्द हो सकता है।
यदि दर्द बहुत तेज हो, सांस लेने में परेशानी हो या सिरदर्द के साथ गर्दन अकड़ने, भ्रम या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
चिकनपॉक्स में क्या नहीं करना चाहिए?
चिकनपॉक्स के दौरान इन सावधानियों का ध्यान रखें:
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छालों को खुजलाने, फोड़ने या उनमें से पानी निकालने से बचें। इससे निशान और संक्रमण हो सकता है।
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बहुत गर्म पानी से न नहाएं और तेज सुगंध वाले साबुन, लोशन या अन्य उत्पाद इस्तेमाल न करें।
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बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या अन्य दवाएं न लें। चिकनपॉक्स वायरस से होता है, इसलिए एंटीबायोटिक इस पर असर नहीं करती।
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बच्चों और किशोरों को एस्पिरिन न दें। इबुप्रोफेन भी डॉक्टर की सलाह के बिना न दें।
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तला-भुना, जंक फूड (समोसा, पकौड़े, फ्राइज), बहुत मसालेदार या ज्यादा नमकीन खाना कम करें। मुंह में छाले हों तो खट्टे फल (नींबू, संतरा, मौसंबी) और बहुत गर्म खाने से भी बचें।
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जब तक सभी छालों पर पपड़ी न बन जाए, तब तक स्कूल, ऑफिस और दूसरे लोगों के नजदीकी संपर्क से बचें। खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों से दूर रहें।
चिकनपॉक्स से बचाव और टीका
चिकनपॉक्स से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका वैरिसेला वैक्सीन (चिकनपॉक्स का टीका) है।
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बच्चों में: आमतौर पर टीके की दो खुराक दी जाती हैं। पहली खुराक 12 से 15 महीने की उम्र में और दूसरी 4 से 6 साल की उम्र में। अपने बच्चे के लिए सही समय बाल रोग विशेषज्ञ से जरूर पूछें।
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किशोरों और वयस्कों में: जिन्हें न पहले चिकनपॉक्स हुआ और न टीका लगा, उन्हें आमतौर पर दो खुराक चार से आठ सप्ताह के अंतर पर दी जाती हैं।
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गर्भावस्था में: यह टीका गर्भावस्था के दौरान नहीं लगाया जाता। गर्भधारण की योजना बना रही महिलाएं डॉक्टर से पूछकर टीका गर्भधारण से कम से कम एक महीने पहले लगवा सकती हैं।
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संपर्क में आने के बाद: गर्भवती महिला, नवजात शिशु या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला व्यक्ति चिकनपॉक्स के मरीज के संपर्क में आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। जरूरत के अनुसार टीका या इम्युनोग्लोबुलिन दिया जा सकता है।
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स्वच्छता: बार-बार हाथ धोएं, खांसते-छींकते समय मुंह ढकें और मरीज के सामान साझा न करें।
टीका लगने के बाद भी कुछ लोगों को हल्का चिकनपॉक्स हो सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में आमतौर पर लक्षण कम और दाने कम होते हैं।
चिकनपॉक्स की जटिलताएं और मेडिकल इलाज
अधिकतर लोगों में चिकनपॉक्स बिना गंभीर परेशानी के ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में जटिलताएं हो सकती हैं। इनमें छालों में जीवाणु संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, निमोनिया (Pneumonia) और दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) शामिल हैं। नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, वयस्कों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इनका खतरा अधिक होता है।
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एंटीवायरल दवा कब दी जाती है?
हल्के मामलों में एंटीवायरल दवा की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर कुछ लोगों को एसाइक्लोविर जैसी एंटीवायरल दवा दे सकते हैं, जैसे गर्भवती महिलाएं, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, किशोर और वयस्क, लंबे समय से स्टेरॉयड लेने वाले या फेफड़े और त्वचा की पुरानी बीमारी वाले मरीज। यह दवा दाने निकलने के बाद जितनी जल्दी शुरू हो, उतनी असरदार मानी जाती है, आमतौर पर पहले 24 से 72 घंटे में। इसे केवल डॉक्टर की सलाह से लें।
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चिकनपॉक्स के बाद दाद (शिंगल्स) का खतरा
चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद भी वायरस शरीर की नसों में निष्क्रिय रहता है। आगे चलकर यह दोबारा सक्रिय होकर दाद (हर्पीज जोस्टर या शिंगल्स (Shingles) का कारण बन सकता है, जिसमें दर्द के साथ छालों की पट्टी बन जाती है।
चिकनपॉक्स में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
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बुखार 102°F (38.9°C) या उससे ज्यादा हो, या चार दिन से अधिक बना रहे।
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छालों के आसपास त्वचा लाल, गर्म, सूजी हुई या बहुत दर्दनाक हो जाए अथवा मवाद दिखाई दे।
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सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, बार-बार उल्टी, तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, भ्रम या असामान्य सुस्ती हो।
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पानी पीने में परेशानी हो या शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखें।
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आंख के आसपास दाने हों या आंख में दर्द या लालिमा हो।
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मरीज नवजात शिशु हो, गर्भवती हो या उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो।
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दवा और ठंडी सिकाई के बाद भी खुजली बहुत ज्यादा बनी रहे।
यदि चिकनपॉक्स का संदेह है, तो अस्पताल जाने से पहले डॉक्टर को फोन पर संक्रमण की जानकारी दें, ताकि दूसरे मरीजों तक संक्रमण न फैले।
चिकनपॉक्स के इलाज में हेल्थ इंश्योरेंस कैसे मदद करता है?
अधिकतर मामलों में चिकनपॉक्स का इलाज घर पर या ओपीडी में हो जाता है, इसलिए खर्च कम रहता है। लेकिन जटिलताएं होने पर अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें डॉक्टर की फीस, जांच और दवाओं का खर्च बढ़ सकता है। स्वास्थय बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार भर्ती होने के खर्च को कवर करने में मदद कर सकता है।
हर पॉलिसी में ओपीडी, दवाओं और भर्ती के कवरेज अलग होते हैं। इलाज से पहले अपनी पॉलिसी का कवरेज, प्रतीक्षा अवधि और अपवाद जरूर जांचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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प्रश्न: चिकनपॉक्स कैसे होता है और कैसे फैलता है?
उत्तर: चिकनपॉक्स वैरिसेला-जोस्टर वायरस से होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने, उसके छालों के तरल से सीधे संपर्क में आने या उसके सामान को छूने से फैल सकता है। -
प्रश्न: चिकनपॉक्स कितने दिन में ठीक होता है?
उत्तर: अधिकतर मामलों में चिकनपॉक्स लगभग 1 से 2 सप्ताह में ठीक होने लगता है। छालों के निशान पूरी तरह हल्के होने में अधिक समय लग सकता है। -
प्रश्न: क्या चिकनपॉक्स को छोटी माता और बड़ी माता कहा जाता है?
उत्तर: चिकनपॉक्स को आम बोलचाल में छोटी माता कहा जाता है। बड़ी माता चेचक (Smallpox) को कहते हैं, जो एक अलग बीमारी है और अब दुनिया से समाप्त हो चुकी है।
