एलआईसी का दावा निपटान अनुपात किसी भी जीवन बीमा कंपनी की विश्वसनीयता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। जब कोई व्यक्ति बीमा पॉलिसी लेता है, तो उसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसके परिवार को बिना किसी परेशानी के दावा राशि मिल सके। ऐसे में एलआईसी (LIC) का दावा निपटान अनुपात यह बताता है कि कंपनी कितने प्रतिशत दावों का सफलतापूर्वक निपटान करती है।
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भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट और पॉलिसी सेवा से जुड़ी जानकारी के आधार पर यह अनुपात नियमित रूप से जारी किया जाता है।
दावा निपटान अनुपात (Claim Settlement Ratio – CSR) वह प्रतिशत है जो यह दर्शाता है कि बीमा कंपनी को एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल दावों में से कितने दावों का निपटान किया गया।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी को एक वर्ष में 1,000 मृत्यु दावे प्राप्त हुए और उसने 980 दावों का भुगतान कर दिया और 20 दावों को खारिज कर दिया, तो उसका दावा निपटान अनुपात (980/1000)% यानि 98% होगा।
CSR को निम्न फॉर्मूले के जरिए निकाला जाता है:
CSR = (एक साल में कुल दावों का निपटान/एक साल में कुल दावे) x 100
यह आंकड़ा आमतौर पर कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में प्रकाशित किया जाता है और बीमा नियामक संस्था IRDAI को भी रिपोर्ट किया जाता है। यह अनुपात उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद करता है कि संकट की घड़ी में कंपनी कितनी भरोसेमंद है।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) देश की सबसे बड़ी और पुरानी जीवन बीमा कंपनी है। हाल के वित्तीय वर्षों में एलआईसी का मृत्यु दावा निपटान अनुपात लगभग 98.35% है।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि कंपनी को प्राप्त अधिकांश वैध दावों का निपटान किया जाता है। हालांकि, सटीक प्रतिशत प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अनुसार बदल सकता है, इसलिए पॉलिसी लेने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम आंकड़ा देखना उचित होता है।
दावा निपटान अनुपात बीमा कंपनी की विश्वसनीयता और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता का संकेत देता है। यदि किसी कंपनी का CSR अधिक है, तो इसका अर्थ है कि वह अधिकतर दावों को स्वीकार कर रही है।
यह अनुपात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
यह कंपनी की भुगतान क्षमता को दर्शाता है।
यह उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाता है।
यह पॉलिसी खरीदते समय तुलना करने में मदद करता है।
यह बताता है कि कंपनी विवादित या अस्वीकृत दावों की संख्या कम रखती है।
हालांकि, केवल CSR के आधार पर निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होता; अन्य कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए।
IRDAI की वार्षिक रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में LIC का मृत्यु दावा निपटान अनुपात लगभग 98% से अधिक के स्तर पर रहा है।
नीचे पिछले 5 वित्तीय वर्षों का दावा निपटान अनुपात दिया गया है:
| वित्तीय वर्ष | दावा निपटान अनुपात (%) |
| 2018-19 | 97.79% |
| 2020-21 | 98.62% |
| 2021-22 | 98.74% |
| 2022-23 | 98.52% |
| 2023-24 | 98.62% |
LIC में दावा दायर करने की प्रक्रिया व्यवस्थित और चरणबद्ध होती है। निम्नलिखित प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है:
मृत्यु की सूचना देना: संबंधित शाखा को लिखित या ऑनलाइन माध्यम से सूचना दी जाती है।
आवश्यक फॉर्म प्राप्त करना: दावेदार को Form A सहित आवश्यक फॉर्म भरने होते हैं।
दस्तावेज जमा करना: मृत्यु प्रमाण पत्र, पॉलिसी बॉन्ड और अन्य आवश्यक प्रमाण संलग्न किए जाते हैं।
दस्तावेज सत्यापन और जांच: LIC दावे की जांच करती है, विशेषकर शीघ्र मृत्यु के मामलों में।
दावा राशि का भुगतान: सभी शर्तें पूर्ण होने पर राशि सीधे नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में NEFT के माध्यम से जमा की जाती है।
LIC में दावा प्रस्तुत करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक होते हैं:
क्लेम फॉर्म A
मूल पॉलिसी दस्तावेज
मृत्यु रजिस्टर से प्रमाणित अंश
आयु प्रमाण पत्र (यदि आयु पूर्व में स्वीकृत/प्रमाणित न हो)
मृतक की संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण (केवल तब, जब पॉलिसी में नामांकन, असाइन या MWP एक्ट के अंतर्गत जारी न की गई हो)
एफ़आईआर की प्रति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट (दुर्घटनात्मक मृत्यु के मामले में)
यदि पॉलिसीधारक की मृत्यु पॉलिसी के पुनर्जीवन की तिथि से तीन वर्ष के भीतर होती है, तो निम्नलिखित अतिरिक्त दस्तावेज आवश्यक हो सकते हैं:
क्लेम फॉर्म B: चिकित्सक द्वारा जारी मेडिकल अटेंडेंट का प्रमाण पत्र
क्लेम फॉर्म B1: यदि बीमित व्यक्ति का उपचार अस्पताल में हुआ हो
क्लेम फॉर्म B2: अंतिम बीमारी का उपचार करने वाले चिकित्सक द्वारा भरा गया प्रमाण पत्र
क्लेम फॉर्म C: पहचान तथा दाह-संस्कार/दफ़न प्रमाण पत्र, जिसे किसी परिचित एवं विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा पूर्ण और हस्ताक्षरित किया गया हो
क्लेम फॉर्म E: रोजगार प्रमाण पत्र (यदि बीमित व्यक्ति नौकरीपेशा हो)
प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR)
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच रिपोर्ट (दुर्घटना या अप्राकृतिक मृत्यु के मामले में)
दावा निपटान अनुपात कई कारकों से प्रभावित होता है, जैसे:
प्रस्ताव फॉर्म में दी गई जानकारी की सटीकता: यदि स्वास्थ्य या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई हो, तो दावा अस्वीकृत हो सकता है।
पॉलिसी की स्थिति: लैप्स पॉलिसी या प्रीमियम बकाया होने की स्थिति में दावा प्रभावित हो सकता है।
दस्तावेजों की पूर्णता: अधूरे या गलत दस्तावेज निपटान प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
धोखाधड़ी या संदिग्ध दावे: ऐसे मामलों में विस्तृत जांच की जाती है।
शीघ्र मृत्यु: पॉलिसी जारी होने के प्रारंभिक वर्षों में मृत्यु होने पर अतिरिक्त जांच की जाती है।
बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर कंपनी अच्छी है तो उसका दावा निपटान अनुपात 100% होना चाहिए। लेकिन व्यवहारिक रूप से यह 100 फीसदी होना कठिन है।
कई बार दावे इसलिए अस्वीकार होते हैं क्योंकि:
पॉलिसी लेते समय गलत जानकारी दी गई हो।
प्रीमियम का भुगतान समय पर नहीं हुआ।
जरूरी दस्तावेज जमा न किए गए हो।
शर्तों का उल्लंघन हुआ हो।
इसलिए 98% दावा निपटान अनुपात भी बहुत अच्छा माना जाता है।
यह बेहद सीधा और व्यवस्थित ढंग से होता है। इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखना जरुरी है-
मृत्यु प्रमाण पत्र और पॉलिसी से संबंधित दस्तावेज जमा करना
जरूरी फॉर्म भरना
कंपनी द्वारा दस्तावेजों की जाँच
दावा राशि का भुगतान
अगर सभी दस्तावेज सही हों और जानकारी स्पष्ट हो, तो दावे का निपटारा आमतौर पर बिना ज्यादा परेशानी के हो जाता है।
एलआईसी का दावा निपटान अनुपात यह दर्शाता है कि कंपनी अपने ग्राहकों के दावों का कितने प्रभावी तरीके से निपटान करती है। एलआईसी का CSR लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।
फिर भी, केवल एक आंकड़े के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पॉलिसी की शर्तों, प्रीमियम, कवरेज और अपनी वित्तीय आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना चाहिए। सही जानकारी और पारदर्शिता के साथ पॉलिसी लेने से भविष्य में दावा निपटान प्रक्रिया सुगम रहती है।
LIC Resources
|
LIC Online Services |
LIC Investment Plans |
LIC Other Plans |
*All savings are provided by the insurer as per the IRDAI approved insurance plan. Standard T&C Apply
^Trad plans with a premium above 5 lakhs would be taxed as per applicable tax slabs post 31st march 2023
+Returns Since Inception of LIC Growth Fund
~Source - Google Review Rating available on:- http://bit.ly/3J20bXZ
++Returns are 10 years returns of Nifty 100 Index benchmark
˜The insurers/plans mentioned are arranged in order of highest to lowest first year premium (sum of individual single premium and individual non-single premium) offered by Policybazaar’s insurer partners offering life insurance investment plans on our platform, as per ‘first year premium of life insurers as at 31.03.2025 report’ published by IRDAI. Policybazaar Insurance Brokers Private Limited does not endorse, rate or recommend any particular insurer or insurance product offered by any insurer. For complete list of insurers in India refer to the IRDAI website www.irdai.gov.in
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