In Unit Linked Insurance Policies, the investment risk is borne by the policyholder. These insurance products do not offer any liquidity in the first 5 years, as they have a mandatory lock-in period of 5 years. During this period, the policyholder cannot fully or partially withdraw the invested amount or surrender the policy.
यूलिप प्लान
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) एक ऐसा वित्तीय प्रोडक्ट है जिसमें निवेश और बीमा का लाभ एक साथ मिलता है। जब आप यूलिप प्लान में प्रीमियम भरते हैं उसका एक हिस्सा जीवन बीमा के लिए जाता है और बाकी का हिस्सा अलग-अलग फंड्स में लगाया जाता है, जिसे अनुभवी फंड मैनेजर्स संभालते हैं। समय के साथ आपका फंड बढ़ने लगता है और साथ में जीवन बीमा से परिवार को भी सुरक्षा मिलती है। यूलिप प्लान जोखिम के साथ आते हैं और यह पूरा निवेश IRDAI के सख्त नियमों के अनुसार काम करता है।
Fund Details |
Fund Size |
NAV |
5 Year |
7 Year |
10 Year |
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Midcap Fund
Fund Size: ₹ 64,395 Cr
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₹ 64,395 Cr |
₹ 48 0.46% |
12.62% |
18.22% Highest Returns |
15.08% |
Get Details |
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Opportunities Fund
Fund Size: ₹ 32,429 Cr
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₹ 32,429 Cr |
₹ 74 0.70% |
9.26% |
15.04% Highest Returns |
11.99% |
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High Growth Fund
Fund Size: ₹ 15,356 Cr
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₹ 15,356 Cr |
₹ 117 0.97% |
18.21% |
24.3% Highest Returns |
18.4% |
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Opportunities Fund
Fund Size: ₹ 3,711 Cr
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₹ 3,711 Cr |
₹ 58 0.21% |
8.86% |
12.68% Highest Returns |
11.99% |
Get Details |
Returns as on 02-11-2026. The returns are the returns of best-performing fund in the plan
Disclaimer :
˜The insurers/plans mentioned are arranged in order of highest to lowest first year premium (sum of individual single premium and individual non-single premium) offered by Policybazaar’s
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ULIP क्या है?
यूलिप का मतलब यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान है। ULIP एक ऐसा वित्तीय प्रोडक्ट है, जो एक ही निवेश पर निवेशकों को बाजार आधारित निवेश और बीमा का लाभ प्रदान करता है। इसमें जो आप प्रीमियम भरते हैं उसका एक हिस्सा जीवन बीमा के लिए लगाया जाता है। बाकी का बचा हुआ प्रीमियम आपके निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर इक्विटी, डेट और बैलेंस्ड फंड में निवेश कर दिया जाता है।
यूलिप प्लान 10-15 साल के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं क्योंकि IRDAI के नियमों के मुताबिक इनमें 5 साल का लॉक इन पीरियड होता है। साथ ही धारा 10(10D) के तहत मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता है। हालांकि, 1 फरवरी 2021 के बाद ली गई पॉलिसी में यह छूट तभी मिलेगी जब आपका सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से अधिक न हो।
यूलिप प्लान कैसे काम करता है?
यूलिप प्लान कैसे काम करता है यह समझकर आप एक बेहतर निवेश कर सकते हैं। चलिए इसे आसान शब्दों में विस्तार से समझते हैं:
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स्टेप 1 - प्रीमियम पेमेंट
आप अपनी पसंद के प्लान और पेमेंट ऑप्शन के हिसाब से नियमित रूप से प्रीमियम भरते हैं और पॉलिसी के नियमों के अनुसार जरूरी चार्जेस काट कर बाकी का प्रीमियम निवेश कर दिया जाता है।
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स्टेप 2 - प्रीमियम एलोकेशन
अब आपके द्वारा भरा गया प्रीमियम दो हिस्सों में बाट दिया जाता है। एक हिस्सा जीवन बीमा के लिए चला जाता है और दूसरा हिस्सा आपकी पसंद के फंड में निवेश कर दिया जाता है।
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स्टेप 3 - पैसा फंड में लग जाता है
आप खुद चुन सकते हैं कि आपका पैसा किस फंड में निवेश होना चाहिए। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी NAV के अनुसार आपको उस फंड की यूनिट्स देती है।
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स्टेप 4 - फंड वैल्यू में बदलाव होना
अब आपकी फंड वैल्यू कम होगी या ज्यादा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपने जो फंड चुना है, उसका बाजार में प्रदर्शन कैसा रहा है।
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स्टेप 5 - मैच्योरिटी पर मिलने वाला लाभ
यूलिप प्लान के मैच्योर होने पर पॉलिसीधारक कुल फंड वैल्यू प्राप्त कर सकता है। कुछ यूलिप प्लान में बोनस, लॉयल्टी एडिशन और मॉर्टैलिटी चार्जेस भी वापस मिल जाते हैं, जो पॉलिसी के दौरान काटे गए थे। साथ ही आप अपने अनुसार चुन सकते हैं कि आप मैच्योरिटी वैल्यू को कैसै प्राप्त करना चाहते हैं, आप इसे एक साथ या नियमित रूप से प्राप्त कर सकते हैं।
यूलिप प्लान में अलग-अलग स्थितियों में पेआउट कैसे काम करता है?
चलिए इस एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं, रोहन एक 35 साल का सॉफ्टवेयर इंजिनीयर है। वह अपने बेटे की उच्च शिक्षा और अपनी रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करने के लिए यूलिप में निवेश करता है:
पॉलिसी की जानकारी
| विशेषताएं | जानकारी |
| मासिक प्रीमियम | 10,000 |
| वार्षिक प्रीमियम | 1,20,000 |
| पॉलिसी अवधि | 30 साल |
| सम एश्योर्ड | 12 लाख |
| निवेश के लिए पसंद | इक्विटी बेस्ड फंड्स |
रोहन का प्रीमियम कैसे निवेश होगा?
रोहन जो प्रीमियम भरता है वह पूरा एक साथ निवेश नहीं होता है। बल्कि पहले जरूरी खर्च चार्जेस उसमें से काट लिए जाते हैं। इसके बाद बचा हुआ पैसा निवेश होता है:
| विशेषताएं | जानकारी |
| मासिक प्रीमियम | 10,000 |
| प्रीमियम एलोकेशन | 300 |
| फंड में कितना पैसा निवेश होगा | 9,700 |
| मॉर्टेलिटी चार्ज | 200 |
| पॉलिसी एडमिशन चार्ज | 100 |
| फंड मैनेजमेंट चार्ज | 1.35% वार्षिक |
ध्यान दें - FMC 1.35% सालाना = ₹9,700 से अलग से नहीं कटता, बल्कि NAV में ही एडजस्ट हो जाता है। उदाहरण में बताए गए सभी चार्ज केवल उदाहरण के लिए उपयोग किए गए है। यह कोई आधिकारिक चार्जेस नहीं है।
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स्थिति 1 - अगर पॉलिसी अवधि के दौरान रोहन की दुर्भाग्यवश मृत्यु हो जाती है।
मान लीजिए पॉलिसी के छठें साल में रोहन की मृत्यु हो जाती है:
विशेषताएं जानकारी मासिक प्रीमियम ₹7,20,000 भरे गए कुल प्रीमियम का 105% ₹7,56,000 फंड वैल्यू ₹9,18,000 सम एश्योर्ड ₹12,00,000 डेथ बेनेफिट ₹12,00,000* डेथ बेनेफिट के रूप में आपको सम एश्योर्ड या कुल प्रीमियम का 105% इसमें से जो भी ज्यादा होता है, पॉलिसी के नियमों के अनुसार वही मिलता है। इस केस में सम एश्योर्ड ज्यादा है तो रोहन को वहीं मिलेगा।
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स्थिति 2 - अगर रोहन पॉलिसी में 30 साल पूरे कर लेता है।
मान लीजिए रोहन 30 साल तक लगातार प्रीमियम भरता है:
विशेषताएं जानकारी मासिक प्रीमियम ₹10,000 वार्षिक प्रीमियम ₹1,20,000 पॉलिसी अवधि 30 साल भरा गया कुल प्रीमियम ₹36,00,000 FMC से पहले अनुमानित वार्षिक रिटर्न 8% अनुमानित FMC 1.35% प्रति वर्ष FMC के बाद अनुमानित वार्षिक रिटर्न (8%-1.35% FMC चार्ज) = 6.65% मैच्योरिटी लाभ फंड प्रदर्शन पर निर्भर मैच्योरिटी पर रोहन के कितना फंड मिलेगा, यह बाजार के प्रदर्शन और कटने वाले चार्जेस पर निर्भर करता है।
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स्थिति 3 - अगर रोहन पॉलिसी के 5 साल पूरे होने से पहले बाहर निकलना चाहता है
मान लीजिए रोहन केवल 3 साल तक ही प्रीमियम भरता है।
स्टेप 1: 3 साल बाद मिलने वाले फंड वैल्यू की गणना
विशेषताएं जानकारी मासिक प्रीमियम ₹10,000 भरा गया कुल प्रीमियम ₹3,60,000 मॉर्टेलिटी चार्ज ₹7,200 प्रीमियम एलोकेशन चार्ज ₹10,800 पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज ₹3,600 कुल अनुमानित पॉलिसी चार्ज ₹21,600 मासिक निवेशित राशि ₹9,400 FMC से पहले अनुमानित वार्षिक रिटर्न 8% अनुमानित FMC 1.35% वार्षिक अनुमानित वार्षिक रिटर्न 6.5% 3 साल के बाद अनुमानित फंड वैल्यू ₹3,73,377 ध्यान दें - हर महीने ₹9,400 के निवेश पर 3 साल बाद मिलने वाला यह पैसा एक अनुमान है। वास्तविक फंड वैल्यू मार्केट के प्रदर्शन और पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करती है।
स्टेप 2: डिसकंटीन्यूड पॉलिसी फंड में ट्रांसफर होने वाली रकम का हिसाब लगा
चलिए मान लेते हैं कि पॉलिसी बंद करने का चार्ज 4,000 रुपये है।
विशेषताएं जानकारी अनुमानित फंड वैल्यू ₹3,73,377 अनुमानित डिसकंटीन्यूड चार्ज ₹4,000 डिसकंटीन्यूड पॉलिसी फंड में ट्रांसफर की गई राशि ₹3,69,377 स्टेप 3: 5 साल के लॉक इन के बाद राशि
DPF में जमा राशि पर IRDAI के नियम के अनुसार कम से कम 4% सालाना गारंटीड ब्याज मिलता है, लेकिन इस पर अधिकतम 0.50% सालाना फंड मैनेजमेंट चार्ज भी लगता है। ऐसे में आपको इसपर 3.50% का रिटर्न मिलेगा।
विशेषताएं जानकारी DPF में ट्रांसफर की गई राशि ₹3,69,377 3.5% की नेट रिटर्न दर से पहले साल का रिटर्न ₹12,928 1 साल के बाद की कुल राशि ₹3,82,305 3.5% की नेट रिटर्न दर से दूसरे साल का रिटर्न ₹13,381 2 साल के बाद अनुमानित कुल राशि ₹3,95,686 3.5% की अनुमानित वार्षिक रिटर्न दर मानकर, 5 साल की लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद रोहन को लगभग ₹3.96 लाख मिलेंगे।
यूलिप प्लान की मैच्योरिटी राशि कैसे जानें?
अगर आपको पता होगा कि समय के साथ आपका निवेश कितना बढ़ सकता है तो जाहिर सी बात है कि आप भविष्य के लिए बेहतर योजना बना सकते हैं। कई इंश्योरेंस कंपनियाँ और फाइनेंस कंपनियाँ यूलिप कैलकुलेटर की सुविधा देती है। इस टूल से आप बिना किसी चार्ज के आसानी से संभावित रिटर्न और कुल मैच्योरिटी राशि का अनुमान लगा सकते हैं।
यूलिप प्लान में प्रीमियम भुगतान के प्रकार
यूलिप प्लान में प्रीमियम भुगतान के निम्नलिखित विकल्प है:
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रेगुलर प्रीमियम - रेगुलर प्रीमियम का मतलब होता है नियमित रूप से प्रीमियम भरना। इसमें आप हर महीने, 3 महीने, 6 महीने या साल में एक बार प्रीमियम भर सकते हैं। इससे नियमित बचत की आदत बनती है।
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सिंगल प्रीमियम - इसमें आपको पॉलिसी का पूरा प्रीमियम एक बार में एकमुश्त रूप से भरना होता है। यह उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प है जिनके पास निवेश के लिए फंड उपलब्ध है।
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लिमिटेड प्रीमियम - इसमें आपको पूरी पॉलिसी की अवधि से कम समय के लिए ही प्रीमियम भरना होता है। प्रीमियम की समय सीमा खत्म होने के बाद भी आपकी पॉलिसी चलती रहती है और आपको इसके सारे फायदे मिलते रहते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने 20 साल के लिए यूलिप प्लान लिया है, जिसमें आपको सिर्फ 10 साल ही प्रीमियम भरना है। 10 साल बाद प्रीमियम बंद होने के बाद भी आपका पैसा बाजार में निवेशित रहेगा और बाजार आधारित रिटर्न बनाता रहेगा।
यूलिप प्लान की विशेषताएं क्या है?
यूलिप प्लान की निम्नलिखित विशेषताएं हैं:
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फंड चुनने का विकल्प - आप अपनी जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य के अनुसार अपनी पसंद का फंड चुन सकते हैं।
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प्रीमियम भुगतान में फ्लेक्सिबिलिटी - यूलिप प्लान में आप अपनी पसंद से रेगुलर प्रीमियम, सिंगल प्रीमियम और लिमिटेड प्रीमियम भरने का विकल्प चुन सकते हैं।
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प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट - आपके प्रीमियम से जो पैसा निवेश में जाता है, उसे अनुभवी फंड मैनेजर्स मैनेज करते हैं। ये आपके लक्ष्यों को ध्यान में रखकर पैसे को सही जगह लगाते हैं।
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टॉप अप प्रीमियम - यूलिप प्लान में एक टॉप अप का विकल्प होता है, जिसके तहत पॉलिसी के दौरान आप अपने प्रीमियम को बढ़ा सकते हैं। इससे आपको बड़ा फंड बनाने का अच्छा मौका मिलता है।
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लॉयल्टी एडिशन - पॉलिसी को लंबे समय तक लगातार चलाने पर बीमा कंपनी आपको इनाम के रूप में फ्री यूनिट्स जोड़कर देती है।
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आंशिक निकासी - 5 साल का लॉक इन पीरियड खत्म होने के बाद आप किसी आपात स्थिति में आंशिक निकासी कर सकते हैं। आंशिक निकासी के बाद भी आपकी पॉलिसी सामान्य रूप से चलती रहती है।
यूलिप प्लान के 5 मुख्य लाभ
यूलिप प्लान आपको बाजार आधारित रिटर्न के साथ-साथ जीवन बीमा की सुरक्षा भी देता है। इससे आप पैसे बढ़ाने के साथ परिवार की वित्तीय सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं, जो कि बहुत जरूरी भी है। यहां यूलिप प्लान के 5 मुख्य लाभ बताए गए हैं:
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बाजार आधारित रिटर्न - यूलिप प्लान आपके प्रीमियम का एक हिस्सा आपकी पसंद के हिसाब से इक्विटी, डेट या बैलेंस्ड फंड में निवेश करता है। लंबे समय तक निवेशित रहने से आपका पैसा बाजार के प्रदर्शन के साथ बढ़ता है और भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार होता है
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लक्ष्य के आधार पर निवेश - ULIP आपको रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे लंबे समय के लक्ष्यों के लिए फंड बनाने में मदद करता है। आप अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार सही फंड चुन सकते हैं।
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निवेश के साथ बीमा का लाभ - ULIP का एक हिस्सा आपकी जीवन बीमा कवरेज के लिए इस्तेमाल होता है। यदि पॉलिसी अवधि के दौरान आपको कुछ हो जाता है, तो आपके परिवार को तय किया गया मृत्यु लाभ मिलता है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित रहता है। ऐसे में उन्हें किसी तरह का आर्थिक संघर्ष नहीं करना पड़ता है।
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कर लाभ - ULIP में भरे जाने वाले प्रीमियम पर आपको पुरानी टैक्स रिजीम के तहत टैक्स छूट का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, मैच्योरिटी या डेथ बेनिफिट पर मिलने वाली राशि भी नियमों के अनुसार टैक्स फ्री होती है, जिससे आपकी बचत पर अच्छा असर पड़ता है।
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अनुशासित निवेश - ULIP आपको नियमित प्रीमियम भरकर लंबे समय तक निवेशित रहने के लिए प्रेरित करता है। लंबे समय में कंपाउंडिंग का बेहतर फायदा मिलता है और बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालते हुए एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है।
पॉलिसीबाजार के माध्यम से यूलिप प्लान में निवेश कैसे करें?
यहां पॉलिसीबाजार के माध्यम से यूलिप प्लान में निवेश करने का तरीका बताया गया है:
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स्टेप 1 - पॉलिसीबाजार के यूलिप पेज पर जाएं, अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करके अपने अनुसार प्लान देखें।
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स्टेप 2 - अब अपनी ज़रूरत के हिसाब से 53 कंपनियों के प्लान्स की तुलना करें। अच्छे रिटर्न और कम चार्ज वाले फिल्टर का इस्तेमाल करें। पॉलिसीबाजार के टूल्स से 3, 5 और 10 साल के रिटर्न देखकर सही प्लान चुनें।
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स्टेप 3 - अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार सही प्लान चुनें, फिर मासिक या वार्षिक प्रीमियम भुगतान का विकल्प और डेथ बेनिफिट कवर चुनें। अंत में प्रीमियम का भुगतान करें।
पॉलिसीबाजार से यूलिप प्लान क्यों खरीदे?
यहां बताया गया है कि आपको पॉलिसीबाजार से यूलिप प्लान क्यों खरीदना चाहिए:
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कई बीमा कंपनायां एक साथ - पॉलिसीबाजार पर आप कई बीमा कंपनियों के प्रीमियम, विशेषताएं और फंड विकल्पों की तुलना कर सकते हैं। इसके लिए आपको कहीं जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।
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रिटर्न चेक करें - आप आसानी से 5,7 और 10 वर्ष का रिटर्न चेक कर सकते हैं, जिससे आपको बाजार का सटीक और वास्तविक आकलन करने में मदद मिलती है। यह डाटा पॉलिसीबाजार द्वारा हर दिन अपडेट होता है।
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कैलकुलेटर - आप यूलिप कैलकुलेटर से फ्री में मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि का अनुमान लगाकर एक बेहतर निवेश कर सकते हैं। साथ ही आप निवेश से पहले सही अवधि और राशि चुनने के लिए भी कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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सही सलाह - आप पॉलिसीबाजार पर अनुभवी विशेषज्ञों की सही सलाह प्राप्त कर सकते हैं, इससे आपको बेहतर निवेश करने में मदद मिलेगी।
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भरोसेमंद प्लैटफॉर्म - 15.8 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड ग्राहकों और 7.16 करोड़ से ज़्यादा बेची गई योजनाओं के साथ यह बाजार का सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है।
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100% पेपरलेस प्रोसेस - आप इसमें आवेदन, KYC और पेमेंट पूरी तरह से घर बैठे ऑनलाइन कर सकते हैं।
यूलिप प्लान खरीदने के लिए जरूरी दस्तावेज
आमतौर पर यूलिप प्लान खरीदते समय आपसे KYC दस्तावेज़ों की मांग की जाती है, यहां सभी जरूरी दस्तावेज़ों की जानकारी दी गई है:
- PAN कार्ड
- आधार कार्ड
- सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, ITR
धारा 123 (पहले धारा 80C) के तहत ULIP प्लान बनाम अन्य निवेश विकल्प
| विशेषता | ULIP | ELSS | PPF | NSC | टैक्स सेविंग FD |
| लॉक-इन अवधि | 5 साल | 3 साल | 15 साल | 5 साल | 5 साल |
| जोखिम का स्तर | मध्यम (चुने गए फंड पर निर्भर) | उच्च (इक्विटी) | कोई जोखिम नहीं | कम | कम |
| निवेश पर टैक्स | धारा 80C/123 के तहत ₹1.5 लाख तक | धारा 80C/123 के तहत ₹1.5 लाख तक | धारा 80C/123 के तहत ₹1.5 लाख तक | धारा 80C/123 के तहत ₹1.5 लाख तक | धारा 80C/123 के तहत ₹1.5 लाख तक |
| रिटर्न पर टैक्स | मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री (यदि वार्षिक प्रीमियम ≤ ₹2.5 लाख* और सम एश्योर्ड का ≤ 10% हो) | LTCG टैक्स: ₹1.25 लाख से अधिक के लाभ पर 12.5% | पूरी तरह से टैक्स-फ्री | कर योग्य | कर योग्य |
| नई टैक्स व्यवस्था के तहत टैक्स लाभ | ULIP में ₹2.5 लाख तक के प्रीमियम पर धारा 10(10D) के तहत मैच्योरिटी छूट जारी रहती है | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
| बीमा कवर | हाँ (लाइफ कवर) | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
यूलिप प्लान से जुड़े चार्जेस
यहां यूलिप प्लान से जुड़े चार्जेस के बारे में बताया गया है:
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प्रीमियम एलोकेशन चार्ज - इंश्योरेंस कंपनी आपके प्रीमियम को अलग-अलग फंड्स में लगाने के लिए जो फीस लेती है, उसे प्रीमियम एलोकेशन चार्ज कहते हैं।
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फंड मैनेजमेंट चार्ज - फंड मैनेजमेंट चार्ज वो फीस होती है जो फंड मैनेजर आपके पैसे को सही जगह निवेश करने और संभालने के लिए लेता है। IRDAI के नियमों के अनुसार यह हर साल अधिकतम 1.35% से ज्यादा नहीं हो सकता है।
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मॉर्टेलिटी चार्ज - बीमा कंपनी द्वारा ULIP में आपको जीवन बीमा की सुरक्षा देने के बदले जो फीस ली जाती है, उसे मॉर्टेलिटी चार्ज कहते हैं।
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पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज - इंश्योरेंस कंपनी द्वारा पॉलिसी का रिकॉर्ड रखने और सेवाएं देने के लिए फीस ली जाती है। यह फीस ₹500 प्रति माह या 2.25%/साल जो भी कम हो, हो सकती है।
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सरेंडर चार्ज - अगर आप अपनी यूलिप पॉलिसी को 5 साल के लॉक इन पीरियड से पहले बंद करते हैं, तो आपको सरेंडर चार्ज देना पड़ता है। इसका चार्ज आपकी पॉलिसी और पॉलिसी से बाहर निकलने वाले वर्ष पर निर्भर करता है।
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आंशिक निकासी और स्विचिंग चार्ज - आप साल में 4 से 12 बार फंड में फ्री स्विचिंग कर सकते हैं। वहीं आप 2-4 बार बिना किसी चार्ज के निकासी कर सकते हैं।
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राइडर्स चार्ज - अगर आप अपनी पॉलिसी में राइडर्स ऐड कराते हैं तो आपको इसके लिए चार्ज देना पड़ता है।
भारत में ULIP प्लान कैसे चुनें?
भारत मे निवेशकों को यूलिप योजनाएँ चुनते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का धयान रखना चाहिए। जैसे-
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व्यक्तिगत निवेश लक्ष्यों का विश्लेषण:
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यूलिप योजना (ULIP Plan) का चयन ऐसे करें कि वह आपके भविष्य के पैसों के लक्ष्य और कितने समय के लिए निवेश करना है, उसके अनुसार हो।"
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अपनी उम्र, परिवार की योजना और आने वाली ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बीमा साफ-साफ तय करें।
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निवेश लक्ष्य तय करें:
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शिक्षा फंड से लेकर रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों तक, सोच समझ कर निवेश लक्ष्य तय करें।
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ऐसे यूलिप की तलाश करें जो आपके निवेश लक्ष्यों के अनुरूप हों और उन्हें पूरा करें।
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यूलिप की तुलना करें:
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अलग-अलग यूलिप योजनाओं की विशेषताओं और लाभों की अच्छी तरह तुलना करें।
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सुविधाजनक और सटीक विश्लेषण के लिए ऑनलाइन इंश्योरेंस कंपेरीज़न पोर्टल का उपयोग करें।
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फ्लेक्सिबिलिटी:
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अपने निवेश के समय के अनुसार यह देखें कि पॉलिसी कितनी फ्लेक्सिबिल है।
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हाइब्रिड, इक्विटी या डेट यूलिप प्लान चुनकर निवेश फ्लेक्सिबिलिटी का आकलन करें।
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जोखिम प्रोफ़ाइल और वित्तीय स्थिरता का मूल्यांकन करें:
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अपनी उम्र और पैसों के अनुसार यह समझना जरूरी है कि आप कब कितना जोखिम उठा सकते है फिर उसी हिसाब से इक्विटी या डेब्ट में निवेश करें।
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युवा लोग ज़्यादा मुनाफे के लिए शेयर बाजार में पैसा लगा सकते हैं, जबकि जो लोग पैसों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते है, वे फिक्स्ड इनकम वाले साधनों का चयन कर सकते है।
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लगाए गए विभिन्न शुल्कों को समझें:
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युलिप प्लान (ULIP Plans) में लगने वाले सभी शुल्क जैसे कटौती शुल्क, फंड प्रबंधन शुल्क आदि को जान ले। इससे पारदर्शिता बनी रहती है।
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आपकी वित्तीय प्राथमिकताओं के अनुरूप यूलिप योजना का चयन करने के लिए शुल्कों के बारे में जानना जरुरी है।
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सुविधाओं और लाभों से अच्छी तरह अवगत रहें:
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हर यूलिप प्लान की विशेषताओं और लाभों को समझें।
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ऐसी योजना चुनें जो आपकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और वित्तीय उद्देश्यों के लिए सबसे उपयुक्त हो।
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योजना के प्रदर्शन की जाँच करें:
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पिछले तीन से चार वर्षों में यूलिप योजना के प्रदर्शन की समीक्षा करें।
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निफ्टी और सेंसेक्स जैसे बेंचमार्क के रिटर्न से अपने निवेश के फायदे या नुकसान की तुलना करें।
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यूलिप फंड और इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी ऑफर का प्रदर्शन:
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निवेश संबंधी निर्णय लेने के लिए यूलिप फंडों के दीर्घकालिक प्रदर्शन की निगरानी करें।
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ऐसी यूलिप योजनाएँ चुनें जो आपके आर्थिक लक्ष्यों के अनुसार सही हो।
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यूलिप कर लाभ और नियम
देखिए, यूलिप पूरी तरह से टैक्स फ्री नहीं है, लेकिन आपको इसमें टैक्स बचत के कई फायदे मिलते हैं। आप यूलिप प्लान में धारा 123 और Schedule II(2) के तहत टैक्स बेनिफिट्स प्राप्त कर सकते हैं। चलिए इनके फायदों को विस्तार से जानते हैं:
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धारा 123 - धारा 123 (पुरानी धारा 80C) के तहत आप हर साल 1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे यह लाभ केवल पुरानी टैक्स रिजीम वालों को ही मिलता है। साथ ही इसकी एक शर्त यह भी है कि आपका लाइफ कवर सालाना प्रीमियम का कम से कम 10 गुना होना चाहिए।
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Schedule II(2) - Schedule II(2) (पुरानी धारा 10(10D)) के नियम:
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अगर आप पॉलिसी और आयकर नियमों की शर्तें पूरी करते हैं तो यूलिप की मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि टैक्स फ्री होती है।
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अगर आपने 1 फरवरी 2021 से पहले यूलिप खरीदा था तो मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि पूरी तरह टैक्स फ्री होगी, फिर चाहे आपका सालाना प्रीमियम कितना भी ज्यादा क्यों न हो।
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अगर आपने 1 फरवरी 2021 के बाद यूलिप खरीदा है तो टैक्स में छूट तभी मिलेगी, जब आपका कुल सालाना प्रीमियम 2.5 लाख या उससे कम हो।
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अगर पॉलिसीधारक की दुर्भाग्यवश मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनी को मिलने वाला फंड हमेशा टैक्स फ्री होता है। इस स्थिति में सालाना प्रीमियम और निवेश की तारीख से कोई असर नहीं पड़ता है।
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2.5 लाख की यह सीमा सिर्फ एक यूलिप पॉलिसी के लिए नहीं है, बल्कि आपके नाम पर चल रही सभी यूलिप पर लागू होती है।
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साथ ही अगर आपके पास 1 फरवरी 2021 के बाद खरीदी गई दो या उससे ज्यादा ULIP पॉलिसी है जिनका कुल प्रीमियम मिलाकर सालाना 2.5 लाख से ज्यादा हो जाता है तो आपको सभी पॉलिसी पर टैक्स नहीं देना होता है। बल्कि आप अपनी पसंद की उन पॉलिसियों को चुन सकते हैं जिनका कुल प्रीमियम ₹2.5 लाख तक रहता है, वे पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेंगी। केवल ₹2.5 लाख की सीमा से ऊपर जाने वाली अतिरिक्त पॉलिसियों के मैच्योरिटी रिटर्न पर ही कैपिटल गेंस टैक्स (LTCG) लागू होगा।
भारत में यूलिप के मौजूदा नियम और बाजार की स्थिति क्या है?
यहां भारत में यूलिप के मौजूदा नियम और बाजार की स्थिति बताई गई है:
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डिस्कंटिन्यूएशन यूलिप के पैसे - अगर आप अपनी यूलिप पॉलिसी को मैच्योरिटी से पहले बीच में ही बंद कर देते हैं तो यह पैसा डिस्कंटीन्यूअंस पॉलिसी फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस दौरान आपको हर साल कम से कम 4% रिटर्न मिलता है और इसमें से केवल फंड मैनेजमेंट चार्ज ही काटा जाता है।
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टैक्स में छूट - यूलिप में पैसे को इक्विटी से डेट में स्विच करने पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है। जबकि म्यूचुअल फंड में हर एक स्विच को रिडेम्पशन माना जाता है और उसकी होल्डिंग अवधि के अनुसार टैक्स लगता है।
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भारत में इंश्योरेंस की स्थिति - साल 2024-25 में भारत की कुल GDP में बीमा का हिस्सा 3.7% पर ही रुका रहा। वहीं जीवन बीमा कराने वाले लोगों का दायरा 2.8% से कम होकर 2.7% हो गया।
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पॉलिसी बंद करने का चार्ज - मैच्योरिटी से पहले यूलिप बंद करने पर लगने वाले शुल्क की एक सीमा होती है। अगर आप पहले ही साल में पॉलिसी बंद कराते हैं तो ज्यादा से ज्यादा 6,000 का शुल्क लगता है, यह शुल्क चौथे साल तक कम होकर 2,000 हो जाता है और 5वें साल से इसपर कोई शुल्क नहीं लगता है।
यूलिप फंड के विभिन्न प्रकार क्या हैं?
ULIP फंड मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है:
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इक्विटी फंड: अगर किसी व्यक्ति का लक्ष्य ज्यादा कमाई है, तो वह अपने पैसे कंपनियों के शेयरों में लगाता है। लेकिन शेयर बाजार में फेर बदल होते रहते हैं, इसलिए इसमें जोखिम होता है। यह तरीका उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो लंबे समय तक निवेश करना चाहते हैं और जोखिम उठाने की क्षमता रखते है ।
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डेट फंड: यहां पैसे को बॉंड में लगाया जाता है जो तय रिटर्न देते हैं। इसमें रिस्क काफी कम होता है और रिटर्न भी स्थिर रहता है। यह उनके लिए अच्छा है जो अपना पैसा सुरक्षित रखना चाहते हैं।
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हाइब्रिड फंड: हाइब्रिड फंड इक्विटी और डेट फंड का मिश्रण, संतुलित जोखिम और रिटर्न देता है, जो स्थिरता के साथ मध्यम गति से विकास की संभावना प्रदान करता है। यह उनके लिए उपयुक्त है जो सीमित जोखिम के साथ इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं।
यूलिप में किसे निवेश करना चाहिए?
यहां उन निवेशकों के बारे में बताया गया जो यूलिप प्लान में निवेश कर सकते है:
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लबी अवधि के निवेशक: यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो दीर्घकालिक निवेश में विश्वास करते हैं और कम से कम 10-15 वर्षों की अवधि के लिए प्रतिबद्ध रह सकते हैं, तो ULIP आपके लिए उपयुक्त हो सकता है।
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जोखिम लेने वाले: क्योकि ULIP का एक हिस्सा बाजार से जुड़े फंडों में निवेश किया जाता है, इसलिए इसमें जोखिम शामिल होता है। यदि आपमें जोखिम लेने की क्षमता है और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हैं, तो यूलिप योजना आपको पसंद आ सकती है।
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दोहरे लाभ की तलाश: क्या आप एक ही योजना के तहत बीमा और निवेश दोनों की तलाश कर रहे हैं? यूलिप योजनाएँ दोहरा लाभ प्रदान करती हैं, जो उन्हें संयुक्त पैकेज चाहने वालों के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
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टैक्स बचतकर्ता: ULIP योजना भुगतान किए गए प्रीमियम के लिए आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर लाभ प्रदान करती है। यदि आप टैक्स बचाने का लक्ष्य बना रहे हैं, तो यह एक अतिरिक्त प्रोत्साहन हो सकता है।
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फ्लैक्सिबल निवेशक: यदि आपको बाजार की स्थितियों के आधार पर फंडों के बीच स्विच करने में सक्षम होने का विचार पसंद है, तो यूलिप योजनाएँ यह फ्लैक्सिबिलिटी प्रदान करती हैं। आप बाजार के प्रदर्शन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर अपने निवेश को इक्विटी से डेट फंड में और इसके विपरीत स्थानांतरित कर सकते हैं।
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लक्ष्य निर्धारित निवेशक: यदि आपके पास कोई खास वित्तीय लक्ष्य हैं जैसे घर खरीदना, अपने बच्चे की शिक्षा के लिए धन देना, या रिटायरमेंट की योजना बनाना, तो यूलिप योजना को इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में आपकी सहायता के लिए व्यवस्थित किया जा सकता है।
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तत्काल तरलता की तलाश नहीं: ULIP आमतौर पर 5 सान की लॉक-इन अवधि के साथ आते हैं। अगर आपको पैसे की तुरंत जरूरत नहीं है और आप कुछ वर्षो तक इंतजार कर सकते हैं, तो यूलिप योजना आपके लिए सही हो सकती है।
ULIP में निवेश क्यों करें?
यहाँ बताया गया है कि आपको यूलिप योजनाओं में निवेश पर विचार क्यों करना चाहिए:
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ज्यादा रिटर्न: यूलिप योजनाएं 10 साल की अवधि में 12%-15% तक आकर्षक रिटर्न प्रदान करती हैं। बैलेंस्ड, इक्विटी और डेट फंड जैसे विकल्पों के साथ, निवेशक जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर अपनी पसंद बना सकते हैं। फंडों के बीच स्विच करने का लचीलापन निवेशकों को अधिकतम रिटर्न प्राप्त करने की अनुमति देता है।
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परेशानी मुक्त स्टॉक प्रबंधन: यूलिप इक्विटी-आधारित मार्केट फंड में निवेश की अनुमति देते हैं, जो दैनिक स्टॉक निगरानी के बिना उच्च रिटर्न प्रदान करते हैं। बीमा कंपनियां और मैनेजर आपकी राशि को कहाँ और कैसे निवेश करना है, इस बात की जानकारी रखते है। और अक्सर बेहतर फैसले लेते हैं।, जिससे पॉलिसीधारक अपने निवेश की जानकारी आसानी से देख और समझ सकते हैं।
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एकाधिक फंड विकल्प: ULIP कई तरह के फंड विकल्प देते हैं, जिससे आप यह तय कर सकते हैं कि आपका पैसा कहाँ लगाया जाए सिर्फ शेयरों में, सिर्फ बॉंड जैसे सुरक्षित विकल्पों में आप पुराने रिटर्न और यूलिप की एनएवी (NAV) देखकर यह समझ सकते हैं कि कौन-सी योजना आपकी जरूरत और जोखिम सहने की क्षमता के हिसाब से सबसे बेहतर है।
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ट्रांसपेरेंसी: यूलिप पारदर्शी होते हैं, यानी इनमें कुछ छिपा नहीं होता। पॉलिसीधारकों को सभी शुल्क, यूलिप का एनएवी और पहले मिला हुआ रिटर्न, यह सब बताया जाता है, यह ट्रांसपेरेंसी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वोत्तम ULIP योजनाओं का चयन करने में सहायता करती है।
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तरलता: यूलिप अक्सर 5 साल की लॉक-इन अवधि के साथ आती है । इसके बाद अगर कोई ज़रूरत या इमरजेंसी पडती है, तो आप कुछ पैसे निकाले जा सकते है। इसे आंशिक निकासी कहते हैं। यूलिप की एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) बीमा कंपनी की वेबसाइट पर आसानी से मिल जाती है।
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कम सरेंडर शुल्क: अत्यधिक सरेंडर शुल्क वाली पारंपरिक योजनाओं के विपरीत, यूलिप में उचित सरेंडर शुल्क होता है। यह सुविधा व्यक्तियों को लचीलापन और वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण वित्तीय हानि के बिना किसी योजना के अनुपयुक्त होने पर उससे बाहर निकलने की अनुमति देती है।
यूलिप एनएवी क्या है?
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यूलिप NAV यानी नेट एसेट वैल्यू का मतलब होता है यूलिप फंड के एक हिस्से की कीमत। यह दिखाता है कि आपके निवेश की वर्तमान वैल्यू क्या है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि आपका निवेश कैसा प्रदर्शन कर रहा है और आपको कितना रिटर्न मिल सकता है।
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यूलिप एनएवी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके निवेश की वैल्यु तय करता है। जब आप यूलिप में निवेश करते हैं, तो आप मौजूदा एनएवी पर यूनिट खरीदते हैं। आपके निवेश का मूल्य फंड के प्रदर्शन और एनएवी में बदलाव के आधार पर बढ़ेगा या घटेगा।
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यूलिप एनएवी की गणना और प्रकाशन बीमा कंपनी द्वारा प्रतिदिन किया जाता है। आप अपने यूलिप फंड का एनएवी बीमा कंपनी की वेबसाइट पर या फंड की फैक्ट शीट में पा सकते हैं।
नए दौर के ULIP प्लान क्या हैं?
नए दौर के यूलिप की निम्नलिखित विशेषताएं है:
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कम शुल्क: नए जमाने के यूलिप में पारंपरिक यूलिप की तुलना में कम शुल्क होता है, जैसे प्रीमियम आवंटन शुल्क, फंड प्रबंधन शुल्क और पॉलिसी प्रशासन शुल्क। इससे लंबी अवधि में निवेशकों को अधिक रिटर्न मिल सकता है।
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अधिक लचीलापन: नए जमाने के यूलिप निवेश विकल्पों, फंड स्विचिंग और आंशिक निकासी के मामले में अधिक लचीलापन प्रदान करते हैं। यह निवेशकों को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार अपनी निवेश रणनीति तैयार करने की अनुमति देता है।
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पारदर्शिता: नए जमाने के यूलिप फंड प्रदर्शन और निवेश लागत के मामले में बेहतर पारदर्शिता प्रदान करते हैं। इससे निवेशकों को अपने निवेश के बारे में जानकारीपूर्ण निर्णय लेने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर, नए जमाने के यूलिप पारंपरिक यूलिप की तुलना में कई फायदे प्रदान करते हैं। लचीले, पारदर्शी और लागत प्रभावी निवेश विकल्प की तलाश कर रहे निवेशकों को नए जमाने के यूलिप में निवेश करने पर विचार करना चाहिए।
यूलिप प्लान्स में मुख्य राइडर्स
यूलिप प्लान में निम्निलिखित मुख्य राइडर्स होते हैं:
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एक्सिडेंटल डेथ बेनिफिट राइडर- दुर्घटना में मृत्यु होने पर अतिरिक्त भुगतान किया जाता है।
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गंभीर बिमारी राइडर - किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में एकमुश्त रूप से भुगतान मिलता है।
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वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर - पॉलिसी के दौरान मृत्यु होने पर बाकी के सभी प्रीमियम कंपनी खुद भरती है, और पॉलिसी चलती रहती है।
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स्थायी विकलांगता राइ़डर - अगर दुर्घटना में आप स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं तो भुगतान किया जाता है।
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इनकम बेनेफिट राइडर - आपके परिवार को एकमुश्त लाभ के बजाय नियमित आय मिलती है।
यूलिप में निवेश करते समय किन गलतियों से बचें?
यूलिप प्लान में निवेश करने से पहले इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है:
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जोखिम को न समझना - यूलिप प्लान में जोखिम होता है, ऐसे में आपका रिटर्न ऊपर-नीचे हो सकता है। आप अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही फंड को चुनें।
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कम समय का निवेश - यूलिप में आपका पैसा बाजार में निवेश होता है और इसका पूरा फायदा लंबे समय में ही मिलता है। इसलिए निवेश तभी करें जब आप लंबे समय तक निवेशित रह सकते हों।
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लॉक इन पर ध्यान न देना - यूलिप 5 साल की अनिवार्य लॉक इन के साथ आता है, ऐसे में इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें।
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चार्जेस और फीस न देखना - किसी इंश्योरेंस कंपनी से कोई भी यूलिप प्लान लेते समय उसके सभी चार्जेस और फीस को जरूर चेक करें। इसका सीधा असर आपकी मैच्योरिटी अमाउंट पर पड़ता है।
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बार-बार फंड स्विच न करें - यूलिप प्लान में आप फंड्स में स्विच कर सकते हैं लेकिन ऐसा बार-बार भी न करें। फंड को बाजार में संतुलित होने का समय दें।
निष्कर्ष
यूलिप, बीमा और निवेश का मिश्रण है यह दोहरे लाभ चाहने वालों के लिए एक अच्छा वित्तीय समाधान है। जबकि वे जीवन कवरेज की सुरक्षा प्रदान करते हैं, यूलिप का निवेश हिस्सा आपको पैसा जोड़ने का मौका देता है। बदलती हुई आर्थिक स्थिति में भी यूलिप एक समझदारी से सोचने वाले निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और अच्छा विकल्प माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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यूनिट-लिंक्ड बीमा योजना में सुनिश्चित राशि क्या है?
वह राशि जो बीमाकर्ता बीमाधारक के निधन की स्थिति में उसके नामित व्यक्ति को भुगतान करने के लिए सहमत होता है, उसे सुनिश्चित राशि के रूप में जाना जाता है। -
फंड वैल्यू क्या है?
यूनिट-लिंक्ड बीमा योजना (ULIP) में जो प्रीमियम आप जमा करते हैं, उसमें से कुछ हिस्सा अलग-अलग शुल्कों के रूप में काट लिया जाता है। शुरुआत में प्रीमियम आवंटन शुल्क जैसे चार्ज सीधे आपके प्रीमियम से काटे जाते हैं। बाकी शुल्क, जैसे फंड प्रबंधन, मृत्यु दर और प्रशासन शुल्क, आपके पैसे के निवेश होने के बाद काटे जाते हैं। ये शुल्क आपकी यूनिट्स को कम करके लिए जाते हैं। इन सभी शुल्कों को घटाने के बाद जो पैसा बचता है, उसे फंड मूल्य कहा जाता है। -
ULIP योजाओं के तहत दोहरा लाभ क्या है?
युलिप योजनाओं के तहत दोहरा लाभ जीवन बीमा और निवेश का है। -
क्या यूलिप पर ब्याज कर योग्य है?
नहीं, यूलिप पर अर्जित ब्याज कर-मुक्त है। -
यदि मैं 5 वर्षों के बाद यूलिप जारी नहीं रख पाता तो क्या होगा?
यदि कोई पॉलिसीधारक 5 साल के बाद प्रीमियम का भुगतान करना बंद कर देता है, तो पॉलिसी तत्काल आधार पर समाप्त कर दी जाएगी और समाप्ति तिथि तक संचित पॉलिसी फंड राशि का भुगतान पॉलिसीधारक को किया जाएगा। 5 वर्ष से अधिक पुरानी पॉलिसियों के लिए कोई सरेंडर शुल्क नहीं है। -
किन निवेशकों को ULIP में निवेश करना चाहिएं?
निम्नलिखित श्रेणी के निवेशक ULIP में निवेश कर सकते है:- लंबे समय के लिए निवेशित रहने वाले निवेशक।
- निवेश के साथ बीमा की सुरक्षा चाहने वाले निवेशक।
- जिनके पास कोई खास वित्तीय लक्ष्य है।
- टैक्स बचत की चाह रखने वाले निवेशक
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क्या ULIP के तहत पहले 5 वर्षों में निकासी संभव है?
नहीं, पहले 5 वर्षों के दौरान निकासी संभव नहीं है। ULIP प्लान में 5 वर्ष की अनिवार्य लॉक इन अवधि होती है। उसके बाद बी निकासी की जा सकती है। -
ULIP की तुलना बीमा योजनाओं से क्यो की जाती है?
म्युच्यूअल फंड, बीमा योजनाओं आदि से बहुत बार यूलिप की तुलना की जाती है। लेकिन यह समझा जरूरी है, कि ULIP पारंपरिक निवेश या बीमा प्लान नहीं है जो केवल बीमा या निवेश का लाभ प्रदान करता है। बल्कि ULIP निवेश और बीमा के लाभो को साथ लेकर आता है। -
कौन सा ULIP प्लान सबसे अधिक रिटर्न दे रहा है?
पिछले कुछ वर्षों में मिड कैप फंड ULIP फंड ने अच्छा प्रदर्शन किया है। निवेश जाँच करके यदि उनके वित्तीय लक्ष्य के अनुरूप हो तो मिड कैप में निवेश कर सकते है।
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