रिटायरमेंट प्लानिंग क्या है?
वृद्धावस्था में आमतौर पर लोगों के पास नियमित आय का साधन नहीं होता है, ऐसे में जीवन शैली के स्तर को बनाके रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए अपनी वृद्धावस्था के बारे में अभी से सोचना आवश्यक है। हमारे आस-पास इतने सारे उदाहरण होते है, जिन्होने समय पर अपनी वृद्धावस्था के लिए योजना नहीं बनाई और उन्हे वृद्धावस्था में संघर्ष करना पड़ा।
यदि वे सभी समय पर रिटायरमेंट प्लानिंग कर लेते तो शायद वृद्धावस्था में इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता। जब हम वृद्धावस्था के बारें में सोचते है, तो हमारे मन में कई सवाल आते है, कि निजी जरूरतें कैसे पूरी होंगी, घर कैसे चलेगा और दवाईयाँ कैसे खरीदी जाएंगी। रिटायरमेंट प्लानिंग इन सभी सवालों के जवाब खोजने में हमारी सहायती करती है। भाारत में कई सरकारी योजनाएं और पेंशन प्लान उपलब्ध है, जो बेहतर वृद्धावस्था को प्रोत्साहित करते है।
रिटायरमेंट प्लानिंग जरूरी क्यों है?
आज के समय में रिटायरमेंट प्लानिंग करना निम्नलिखित कारणों से जरूरी है:
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लंबे और बेहतर जीवन की तैयारी
पिछले कुछ दशकों में विश्व ने स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्रोंं में कमाल की सफलता हासिल की है, जिस से लोगो की जीवन शैली में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। भारत में औसत जीवन प्रत्याशा 2015 में लगभग 68 वर्ष थी, 2020 तक यह बढ़कर लगभग 70 वर्ष हो गई थी और अब इस संख्या मे लगातार इज़ाफा हो रहा है। इससे यह संभावना बनती है कि लोग सेवानिवृत्ति के बाद 20 से 30 वर्ष या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं।
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महंगाई को मात देना
महंगाई समय के साथ खरिदने की शक्ति को कम कर देती है। यदि महंगाई दर 5% सालाना है, तो खर्च हर 14 साल में दोगुना हो जाता है। अगर आप 20 साल बाद रिटायर होंगे, तो आज के मुकाबले आपके खर्च दोगुने से भी ज्यादा होंगे। किसी पेंशन प्लान में निवेश कर व्यक्ति अपनी वृद्धावस्था के लिए अच्छा फंड तैयार कर सकता है।
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परिवार की सुरक्षा
रिटायरमेंट का मतलब केवल अपनी वृद्धावस्था को सुरक्षित करना नहीं है, बल्कि आपके साथ आपका परिवार भी सुरक्षित होगा। आज आप कमा पा रहे है, तो परिवार में नियमित आय का साधन है। कल को जब बुढ़ापे के कारण आप कमा नहीं पाएंगे तो परिवार की जरूरतें कैसे पूरी होंगी?, ऐसी ही स्थिती के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग की जाती है।
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जीवन शैली के स्तर को बनाए रखना
वृद्धावस्था में नियमित आय का साधन नहीं होता है, आमतौर पर लोग अपनी बचत पर निर्भर करते है। लेकिन बढ़ती मंहगाई में वह बचत भी कब तक साथ देगी।, एक समय के बाद आप जीवन शैली के स्तर को बनाने में सर्घष कर सकते है। इसलिए ऐसी स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना जरूरी है।
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सेवानिवृत्ति लक्ष्यों को हासिल करना
एक आम आदमी जीवन भर सोचता है, कि पहले कमा लेता हूँ, रिटायरमेंट के बाद अपने सपनों को पूरा करुंगा। लेकिन जब सपनों को पूरा करने का समय आता है, तो महंगाई के कारण पैसा कम पड़ने लगता है। रिटायरमेंट प्लानिंग यह सुनिश्चित करती है, कि आपकों सपनों के साथ समझौता न करना पडे़। यह सपने कुछ भी हो सकते है, बेहतर जीवन जीना, विदेश घुमना, तीर्थ यात्रा करना, बच्चों की उच्च शिक्षा या बच्चों का विवाह।
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मुश्किल परिस्थितियों के लिए तैयार रहना
आज के समय कोई भी मुश्किल स्थिति बताकर नहीं आती है, कब क्या हो जाएं, इसका पूर्व अनुमान नही लगाया जा सकता है। लेकिन किसी भी आपात या मुश्किल परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार रहा जा सकता है। सेवानिवृत्ति योजना ऐसी ही परिस्थितियों के लिए आपात फंड बनाने में सहायता कर सकते है।
भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पात्रता क्या है?
रिटायरमेंट प्लानिंग के तहत किसी भी प्लान में निवेश करने के लिए कुछ मुख्य शर्तों के अधीन होना होता है:
- प्रवेश आयु - भारत में अधिकतम योजनाओं मे प्रवेश आयु 18 तय की गई है, आप जितनी जल्दी योजनाओं में निवेश शुरु करेंगे आपको उतना ही लाभ मिलेगा।
- योगदान - योजनाओं मे आपको नियमित रुप से योगदान करना होता है, कई योजनाएं आपको मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक रूप से योगदान करने का विकल्प प्रदान करती है।
- परिपक्वता आयु - वेसटिंग ऐज वह समय होता जब आपको योजना का लाभ मिलने लगता है। आमतौर पर यह 40 से 80 साल के बीच का समय होता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
रिटायरमेंट प्लान करते समय कुछ बातों पर ध्यान देना आवश्यक है:
- रिटायरमेंट की आयु और समय सीमा - सबसे पहले जानिए कि आप काम करना कब बंद करना चाहते है?, यह सुनिश्चित करता है कि आपके पास निवेश करने के लिए कितना समय है और आप कितने समय तक निवेशित रह सकते है।
- जोखिम उठाने की क्षमता - युवा निवेशक आमतौर पर अधिक जोखिम उठा सकते हैं, क्योंकि उनके पास समय होता है। यदि आपकी आयु अधिक है तो, ऐसे में अपने पैसों की सुरक्षा को पहले प्राथमिकता दें।
- वर्तमान आर्थिक स्थिति - अपने खर्च, आय, लोन और संपत्ति को जानिए और उनके अनुसार योजना बनाएं।
- भविष्य के खर्च - महंगाई को ध्यान में रखकर विचार करें कि आपकी जीवन शैली के अनुसार भविष्य मे क्या जरूरत पड़ सकती है।
- लोन का भुगतान - कोशिश करें रिटायरमेंट से पहले ज्यादा ब्याज वाले कर्ज को चुकता करदें।
- विविध पोर्टफोलियो- अपने निवेश को NPS, PPF, ULIP, रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड जैसे विभिन्न विकल्पों में मे निवेश करे।
- आय के नियमित साधन पर ध्यान दें - ऐसी योजनाओं मे निवेश करें जिनसे नियमित आय मिलती रहे। जैसे एन्युटी प्लान्स, जो रिटायरमेंट के बाद आपको नियमित आय प्रदान करता है।
- वार्षिक समीक्षा- जैसे-जैसे आपके लक्ष्य बदलते हैं, अपने पोर्टफोलियो की नियमित रूप से जांच करें और उसे संतुलित करते रहे।
भारत में रिटायरमेंट योजनाओं के प्रकार
भारत में रिटायरमेंट प्लान के निम्नलिखित प्रकार है:
| योजना प्रकार |
विवरण |
कर लाभ |
किसके लिए उपयुक्त |
| एन्युटी प्लान्स |
एन्यूटी प्लान्स बीमा कंपनियो द्वारा प्रदान किया जाने वाला निवेश विकल्प है। इसके तहत तत्काल या जब आप चाहे नियमित आय प्राप्त की जा सकती है। |
धारा 80C के अंतर्गत कटौतियाँ |
वे लोग जो सुनिश्चित रिटायरमेंट आय चाहते हैं। |
| पेंशन योजनाएं |
नियोक्ता द्वारा प्रायोजित या व्यक्तिगत योजनाएं; रिटायरमेंट आय के लिए बनाई गई; ये निर्धारित लाभ या निर्धारित योगदान आधारित हो सकती हैं। |
धारा 80C और धारा 10 (10D) के अंतर्गत कटौतियाँ |
नौकरीपेशा और खुद का काम करने वाले लोग जो रिटायरमेंट के लिए बचत करना चाहते हैं। |
| वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) |
पोस्ट ऑफिस सिनियर सिटीजन स्कीम एक सरकारी योजना है, जो सुरक्षित रिटर्न और हर तीन महीने में ब्याज प्रदान करती है। |
धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की कटौती की सुविधा। |
60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक इसमे निवेश कर सकते है। |
| सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) |
लंबी अवधि की सरकारी बचत योजना, जिसमें ब्याज और मेच्योरिटी की राशि टैक्स फ्री होती है। |
धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की कटौती की सुविधा। |
सभी आयु के व्यक्ति इस योजना में निवेश कर सकते है। |
| राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) |
सरकारी फिक्स्ड इनकम योजना, जिसमें 5 साल की मेच्योरिटी होती है और ब्याज दर समय-समय पर बदली जाती है। |
धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की कटौती की सुविधा। |
सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले लोग। |
| राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) |
बाजार से जुड़ी पेंशन योजना जो शेयरों, बॉन्ड्स और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करती है। |
(धारा 80CCD(1B) सहित) ₹2 लाख तक की कटौती की सुविधा। |
निवेशक जो मध्यम से अधिक जोखिम उठा सकते है |
| डेट म्यूचुअल फंड |
यह प्लान फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज़ में निवेश करती है, रिटर्न बाजार से जुड़े होते हैं, लेकिन आमतौर पर शेयरों की तुलना में सुरक्षित माने जाते हैं। |
पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाया जाता है। |
रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके लोग जो जोखिम से बचना चाहते हैं। |
आपको रिटायरमेंट के लिए कितने पैसों की जरूरत पड सकती है?
आमतौर पर यह इस बात पर निर्भर करता है, कि रिटायरमेंट के बाद आपकी जीवन शैली कैसी होगी। रिटायरमेंट के फंड की गणना कुछ मुख्य बातों पर निर्भर करती है, आप गणना करने के लिए पॉलिसी बाजार के पेंशन कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते है।
- मासिक खर्च - अपने वर्तमान खर्चों का आकलन करें और भविष्य के खर्चो का अनुमान लगाएं।
- वर्तमान बचत - रिटायरमेंट सेविंग के लिए अलग बैंक खाता बनाएं।
- नियमित निवेश - अपने नियमित एसआईपी को भी शामिल करें।
- महंगाई दर - भविष्य के लिए 5-7% महंगाई दर मान कर चलें।
- जीवन प्रत्याशा - रिटायरमेंट प्लान हमेशा 20 से 30 साल का सोच कर करें।
रिटायरमेंट प्लानिंग में अक्सर की जाने वाली गलतियाँ
रिटायरेंट प्लानिंग करते समय लोग अक्सर कुछ गलतियाँ करते है:
- जल्दी शुरुआत न करना - सेवानिवृत्ति योजना में देरी करने से फंड कम बनता है, जबकि जल्दी निवेश करने से कंपाउंडिंग के माध्यम से तेज़ी से बढ़ता है।
- भविष्य में बढने वाली महंगाई और खर्चो का अनुमान न लगाना - लोग अक्सर महंगाई को हल्कें में आक लेते है और बिना सोचें समझे योजना बना लेते है।
- कर्ज को रिटायरमेंट से पहले चुकता न करना - कर्ज आय पर बोझ डालता है। बेहतर होगा कि रिटायरमेंट से पहले सभी कर्ज चुका दिए जाएं ताकि मन शांत रहे।
- स्वास्थ्य और आपातकालीन खर्चों को ध्यान में न रखना - जब आयु बढ़ती है, तो स्वास्थ्य संबंधी खर्च भी बढ़ते है, इन्हे अनदेखा करना आपकी मुश्किलें बढ़ा सकता है।
- आय के एक साधन पर निर्भर रहना - एक आय पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। स्थिरता बनाए रखने के लिए एक सा ज्यादा आय स्त्रोत के बारे मे सोचिएं।
- निवेश पर नियमित ध्यान न देना - आपके रिटायरमेंट प्लान को समय-समय पर अपडेट करना ज़रूरी है।
फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली मूवमेंट
FIRE मूवमेंट का उद्देश्य उम्र से पहले रिटायर होकर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना है। इसके तहत लोग बचत और निवेश करते हैं ताकि जल्दी रिटायर हो सकें।
प्रमुख कदम:
- मुश्किल परिस्थितियों के लिए फंड तैयार करना
- संपूर्ण बीमा कवरेज प्राप्त करना
- समझदारी और नियमित रूप से निवेश करना
- FIRE कैलकुलेटर से अपना FIRE नंबर की गणना करना
- रिटायरमेंट के बाद हर साल 3-4% निकासी करना
क्या आप रिटायरमेंट के लिए तैयार है ?
रिटायरमेंट प्लानिंग के दौरान अपने आप से यह कुछ सवाल पूछें, इससे यह सुनिश्चित होगा कि आप रिटायरमेंट के लिए कितना तैयार है:
- प्रश्न 1 - क्या आपने अपनी रिटायरमेंट की आयु और खर्चों का अनुमान लगाया है?
- प्रश्न 2 - क्या आपनें एक से अधिक आय के स्त्रोत के बारें में सोचा है?
- प्रश्न 3 - क्या आप रिटायरमेंट के लिए नियमित रूप से बचत कर रहे हैं?
- प्रश्न 4 - क्या आपने महंगाई और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को ध्यान में रखा है?
- प्रश्न 5 - क्या आपके पास पर्याप्त हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस है?
- प्रश्न 6 - क्या आपने ज्यादा ब्याज वाले कर्ज चुका दिए हैं?
- प्रश्न 7 - क्या आपके परिवार को आपकी रिटायरमेंट योजना और ज़रूरी दस्तावेज़ों की जानकारी है?
- प्रश्न 8 - क्या आप हर साल अपनी रिटायरमेंट योजना की समीक्षा करते हैं?
अगर आपके जवाब नहीं है, तो आप अभी रिटायमेंट के लिए तैयार नही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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रिटायरमेंट के लिए कितना फंड आवश्यक है?
रिटायरमेंट के लिए कितने पैसे चाहिए, इसका अनुमान लगाने के लिए आपको अपने अभी के खर्च, इलाजों के लिए खर्च, महंगाई और आयु के अनुसार योजना बनानी चाहिए। ऑनलाइन रिटायरमेंट कैलकुलेटर से आप आसानी से जरूरी राशि का अनुमान लगा सकते हैं।
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भारत मे रिटायरमेंट प्लान्स का लाभ प्राप्त करने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?
भारत में अधिकतम रिटायरमेंट प्लान्स में न्यूनतम आयु 18 वर्ष है।
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50-30-20 बजट नियम क्या है और यह रिटायरमेंट प्लानिंग से कैसे जुड़ा है?
50-30-20 नियम के अनुसार, आपकी कमाई का 50% जरूरी खर्चों पर, 30% इच्छा से जुड़े खर्चों पर और 20% बचत व निवेश पर लगाना चाहिए। यह नियम रिटायरमेंट के लिए बचत को बढ़ावा देने में सहायता करता है।
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रिटायरमेंट के लिए नया 4% नियम क्या है?
नया 4% नियम कहता है कि रिटायरमेंट के पहले साल अपनी कुल बचत का 4% निकालें और हर साल महंगाई के हिसाब से इसे थोड़ा बढ़ाते जाए। इससे आपकी बचत कम से कम 30 साल तक चल सकती है, लेकिन बाजार की स्थिति के अनुसार इसमें लचीलापन रखना जरूरी है।