म्यूचुअल फंड के 6 मुख्य नुकसान
नीचे म्यूचल फण्ड में निवेश करने से होने वाले मुख्य 6 नुकसान की सूची दी गई है:
- बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम होना - म्यूचुअल फंड में बाजार में आई गिरावट का असर सीधे आपकी निवेश राशि के मूल्य पर पड़ता है, इससे आपकी फंड यूनिट्स की कीमत कम हो जाती है। इसके अलावा, अगर आप किसी एक ही विशेष फंड में पूरी राशि निवेश करते हैं, तो एक झटके में आपका पैसा डूब भी सकता है।
- अधिक एक्सपेंस रेशियो होना - आमतौर पर अपने फंड को मैनेज करने के लिए हमें फंड मैनेजर की आवश्यकता होती है, जिसकी फीस आपके निवेश शुल्क में से काट ली जाती है, इसको एक्सपेंस रेशियो भी कहते हैं। आपके म्यूचुअल फंड में अधिक एक्सपेंस रेशियो का होना, आपके फंड से मिलने वाले मुनाफे को कम कर सकता है।
- निवेश पर नियंत्रण न होना - आपके म्युचुअल फंड में निवेश के सभी निर्णय आपके द्वारा चुना गया मैनेजर लेता है। यदि आपका कोई एक शेयर खराब प्रदर्शन कर रहा है, तब भी उसे फंड से बाहर निकालना आपके नियंत्रण में नहीं होता है, जो कि आपके लिए म्यूचल फण्ड निवेश का एक बड़ा नुकसान है।
- लॉक-इन अवधि और एग्जिट लोड जुर्माना होना - ELSS म्यूचुअल फंड में निवेश के दौरान लॉक-इन अवधि रहती है। इस अवधि के दौरान फंड से राशि निकासी की अनुमति नहीं होती है। इसी प्रकार यदि आप फंड के एग्जिट लोड अवधि से पहले यूनिट्स बेच देते हैं, तो आपकी राशि से 1% तक की कटौती की जा सकती है।
- पोर्टफोलियो का ओवरलैप हो जाना - यह समस्या आपके म्यूचुअल फंड में भारी नुकसान कर सकती है। दरअसल, कई बार निवेशक ज्यादा रिटर्न प्राप्त करने के लिए बहुत सारे फंड खरीद लेते हैं, लेकिन यदि अनजाने में सभी फंड किसी एक शेयर में निवेश कर देते हैं, तो आपको विविधीकरण का लाभ नहीं मिल पाता है। साथ ही, पैसे डूबने का खतरा बढ़ जाता है।
- मुनाफे पर टैक्स लगना - जब आप यूनिट्स बेचने पर अपने प्राप्त मुनाफे पर टैक्स चुकाते हैं, तो दोबारा निवेश करने के लिए आपके पास कम मूलधन बचता है। साथ ही, 1 साल से पहले इक्विटी फंड्स से यूनिट्स बेचने पर आपके रिटर्न पर सीधे 20% का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। ये दोनों ही म्युचुअल फंड के मुख्य नुकसान में शामिल हैं।
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म्यूचुअल फंड में नुकसान से बचने के आसान तरीके
म्युचुअल फंड में रिस्क है, लेकिन कुछ तरीकों की मदद से इसे कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे:
- अपने लक्ष्य के अनुसार निवेश करें - अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करने से आप सुरक्षित रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, छोटी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी के बजाय डेट फंड में निवेश करना बेहतर होता है।
- निवेश के लिए लंबी अवधि चुनें - बाजार के जोखिमों से बचने के लिए म्यूचुअल फंड में हमेशा 5 से 7 साल तक निवेश करना बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे कंपाउंडिंग की शक्ति से बड़ा रिटर्न बनाने में मदद मिलती है।
- पोर्टफोलियो को प्लानिंग से डाइवर्सिफाई करें - म्यूचुअल फंड के नुकसान को कम करने के लिए सारा पैसा एक ही फंड में लगाने के बजाय अलग-अलग सेक्टर और एसेट क्लास में निवेश करें। इससे यदि एक सेक्टर में गिरावट आती है, तो दूसरा फंड आपके पोर्टफोलियो को संभाल लेता है।
- गिरावट देख कर सारी यूनिट्स न बेचें - बाजार में गिरावट आने पर यूनिट्स को बेचने की गलती न करें। इसके बजाय अधिक यूनिट्स खरीदें क्योंकि इससे लंबी अवधि में बड़ा रिटर्न मिल सकता है।
- पोर्टफोलियो पर नजर रखें - हर महीने एक या दो बार अपने निवेश के प्रदर्शन की समीक्षा जरूर करें। यह तरीका लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले फंड से समय पर बाहर निकलने में मदद करता है।
निष्कर्ष
म्यूचुअल फंड के नुकसानों में बाजार का जोखिम, निवेश पर नियंत्रण न होना, एक्सपेंस रेशियो का अधिक होना, लॉक-इन और एग्जिट लोड पर जुर्माना होना आदि शामिल हैं। हालांकि निवेश की बेहतर समझ आपको इन नुकसानों से बचा सकती है। अपने बजट और लक्ष्य के अनुसार सही फंड मैनेजर चुन सकते हैं। साथ ही, गिरावट के समय अधिक यूनिट्स खरीद कर लंबे समय में कंपाउंडिंग का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं अगर आप म्यूचुअल फंड में एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचना चाहते हैं तो आप SIP के माध्यम से भी इसमें निवेश कर सकते हैं।