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म्यूचुअल फंड में लॉक-इन पीरियड

म्यूचुअल फंड में कितने साल का लॉक-इन पीरियड होगा, ये निवेशक के फंड के प्रकार पर निर्भर करता है। जैसे कि यदि आपका टैक्स सेविंग फंड है, तो उस पर 3 साल का ELSS लॉक-इन अनिवार्य रहेगा। वहीं अधिकतर ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड में कोई लॉक-इन अवधि नहीं होती है। साथ ही, इसमें से आप कभी भी पैसे निकाल सकते हैं।

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म्यूचुअल फंड में लॉक-इन अवधि क्या है?

लॉक-इन पीरियड म्यूचुअल फंड पर लगने वाली एक समय सीमा है, जिसके दौरान निवेशक अपनी फंड यूनिट्स को बेच नहीं सकते हैं। यह तय समय अधिकतर आपके फंड के प्रकार और फंड हाउस पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं, आपके म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट का लॉक-इन पीरियड क्या है? और आप इससे कब पैसे निकाल सकते हैं।

म्युचुअल फंड के आधार पर लॉक-इन अवधि

नीचे म्यूचुअल फंड के विभिन्न प्रकार के आधार पर लॉक-इन अवधि की जानकारी दी गई है:

फंड का नाम लॉक-इन पीरियड
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) 3 साल

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (FMPs)

1 से 5 साल

क्लोज़ एंडेड फंड्स

3 से 5 साल तक

हाइब्रिड और डेट फंड

कोई अनिवार्य लॉक-इन नहीं

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म्यूचुअल फंड निवेश में लॉक-इन पीरियड के प्रकार

नीचे म्यूचुअल फंड लॉक-इन पीरियड के मुख्य प्रकार बताए गए हैं:

  1. इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)

    ELSS एक टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फंड होता है, जिसमें 3 साल की लॉक-इन अवधि रहती है। इस म्यूचुअल फंड में निवेश करके आप इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के साथ-साथ शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न प्राप्त करते हैं। साथ ही अगर ELSS फंड में SIP के माध्यम से भी निवेश करते हैं, तब भी 3 साल तक पैसे नहीं निकाल सकते हैं।

    उदाहरण: Nippon India ELSS Tax Saver Fund

  2. क्लोज-एंडेड फंड

    क्लोज-एंडेड फंड्स में निवेशक केवल न्यू फंड ऑफर (NFO) के दौरान ही प्रवेश कर सकते हैं। साथ ही, इन फंड्स की मैच्योरिटी अवधि पहले से ही तय होती है। फंड की तय समय सीमा से पहले निवेशक सीधे फंड हाउस से अपना पैसा नहीं निकाल सकते हैं।

    उदाहरण: Capital Protection Funds

  3. फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान्स (FMP)

    फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान्स FMPs एक प्रकार के क्लोज-एंडेड डेट म्युचुअल फंड होते हैं, जिनकी लॉक-इन अवधि 1-5 सालों तक हो सकती है। चूंकि ये फंड डेट म्यूचुअल फंड के अंतर्गत आते हैं, इसीलिए इनमें निवेशकों को सरकारी सिक्योरिटीज और कॉरपोरेट बॉन्ड्स में निवेश कर के बाजार के जोखिम से थोड़ी राहत मिलती है।

    उदाहरण: HDFC FMP Fund

  4. हाइब्रिड डेट फंड्स

    आमतौर पर हाइब्रिड डेट फंड्स में आपकी यूनिट्स पर लॉक-इन पीरियड नहीं होता हैं। ये फंड ओपन-एंडेड फंड के अंदर आते हैं, जिनमें आप कभी भी अपना पैसा आसानी से निकाल सकते हैं।

    उदाहरण: Debt-oriented Hybrid Fund

लॉक-इन अवधि तय करने की मुख्य विशेषता

जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तब आपका पैसा विभिन्न फंड में जाता है, जिनकी लॉक-इन अवधि अलग-अलग हो सकती है। आइए लॉक इन पीरियड से जुड़ी मुख्य विशेषताएं जानते हैं:

  • राशि निकासी पर रोक - लॉक-इन अवधि के दौरान निवेशक अपने निवेश को समय से पहले नहीं निकाल सकते हैं। इससे फंड मैनेजर को फंड बेहतर तरह से मैनेज करने में आसानी मिलती है।
  • नियम तोड़ने पर सख्ती - यदि आप किसी फंड से निर्धारित समय से पहले पैसे निकालने या यूनिट्स बेचने का सोच भी रहे हैं, तब भी यह जुर्माने के बाद भी लॉक-इन पीरियड के अंदर संभव नहीं है।
  • फंड की लिक्विडिटी बनती है - लॉक-इन पीरियड के कारण फंड मैनेजर को बार-बार पैसा निकालने की चिंता नहीं होती है। इससे वे लंबी अवधि के साथ बेहतर रिटर्न बना सकते हैं।
  • विशेष फंड पर टैक्स लाभ - ELSS फंड्स में 3 साल का लॉक-इन रहता है, लेकिन साथ में धारा 80C के तहत टैक्स बचत का लाभ मिलता है। हालांकि, ये लाभ केवल Old Tax Regime चुनने पर ही मिलता है।
  • लॉक-इन अवधि में भिन्नता - अलग अलग म्यूचुअल फंड में लॉक-इन पीरियड भी अलग-अलग हो सकती है। ELSS लॉक इन पीरियड 3 साल तक होता है, जबकि क्लोज-एंडेड डेट फंड्स में 5 साल तक हो सकती है।

इसके बारे में और जानें : म्यूचुअल फंड्स के बारे में और जानें

निष्कर्ष

म्यूचुअल फंड में लॉक-इन पीरियड पूरी तरह तय नहीं होता है, यह आपके फंड की कैटेगरी पर निर्भर करता है। जैसे यदि आपका फंड ELSS फंड है, तो आपके फंड पर 3 साल तक लॉक रहेगा। वहीं, अगर आपका फंड क्लोज एंडेड फंड है, तो इसमें 3-5 साल या मैच्योरिटी तक लॉक रहता है। इसीलिए जब भी फंड चुनें, उसकी तय लॉक-इन अवधि जरूर पता करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • म्यूचुअल फंड में लॉक-इन अवधि का क्या मतलब होता है?

    म्यूचुअल फंड में लॉक-इन अवधि का मतलब उस समय सीमा से होता है, जिसके पूरा होने तक आप अपने फंड से किसी भी तरीके से यूनिट्स बेच नहीं सकते हैं।
  • क्या मैं अपने 3 साल के लॉक इन म्यूचुअल फंड को रिडीम नहीं कर सकता?

    जी नहीं, 3 साल पूरे होने से पहले आप अपने निवेश को रिडीम नहीं कर सकते हैं। साथ ही, ध्यान रखें कि ELSS में आपकी हर एक किस्त पर अलग से 3 साल का लॉक-इन लागू होता है।
  • म्यूचुअल फंड कितने साल तक रखना चाहिए?

    आमतौर पर बेहतर रिटर्न के लिए इक्विटी फंड्स को कम से कम 5 से 7 साल तक जारी रखना चाहिए। हालांकि, आपका लॉक-इन खत्म होने के बाद भी आप उसे चालू रख सकते हैं।
  • अपने फंड की लॉक-इन अवधि कैसे चेक करें?

    आपके फंड हाउस द्वारा ईमेल पर भेजे गए आधिकारिक अकाउंट स्टेटमेंट में भी लॉक-इन की तारीख लिखी होती है।
Claude
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