नो-लोड फंड में यूनिट्स खरीदते और बेचते समय आपसे कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। इस फंड में आपका पूरा निवेश सीधे फंड में जाता है, जिससे अधिक रिटर्न मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं। लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि आपका कुल फंड चार्ज ही शून्य हो, आपके फंड मैनेजमेंट के हिसाब से फंड पर वार्षिक प्रबंधन शुल्क यानी Expense Ratio लग सकता है।
₹1 Crore* Tax-Free
No-load फंड को लोड-फ्री फंड भी कहते हैं। ये वह म्यूचुअल फंड होते हैं, जिनमें आपको निवेश करने के लिए या निवेश से एग्जिट लेने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। साथ ही, इन फंड्स को आप सीधे फंड हाउस या AMC से खरीद सकते हैं, जिससे आपका ब्रोकर चार्ज भी बच सकता है। उदाहरण - SBI Bluechip Direct Fund एक नो-लोड फंड है।
मान लीजिए आपने ₹10,000 किसी फंड में सीधे कंपनी की वेबसाइट से लगाए हैं। तब ऐसे में आपका कोई ब्रोकर नहीं होता है और आपका 0% बिक्री कमीशन लगता है। वहीं लोड फंड में कम से कम 5% का लोड कमीशन लग जाता है।
नो लोड फंड के जरिए SIP में निवेश करने से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
नो-लोड फंड में निवेश करने के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है:
नीचे लोड और नो-लोड म्यूचुअल फंड के बीच मुख्य अंतर की जानकारी दी गई है:
| मुख्य अंतर | नो-लोड म्यूचुअल फंड | लोड म्यूचुअल फंड |
| कमीशन | कोई बिक्री कमीशन नहीं होता है | खरीदने/बेचने पर कमीशन कटता है |
| खरीदारी | फंड सीधे कंपनी की वेबसाइट/ऐप से खरीद सकते हैं | ब्रोकर या बैंक एजेंट के ज़रिए खरीदारी होती है |
| पूरा पैसा निवेश | 100% पैसा सीधे इन्वेस्ट होता है | कमीशन कटने के बाद पैसा इन्वेस्ट होता है |
| फंड चुनना | खुद रिसर्च करनी पड़ती है | ब्रोकर सही फंड चुनने में मदद करता है |
नो-लोड फंड में आपका पूरा पैसा म्यूचुअल फंड में निवेश होता है, क्योंकि इसमें ब्रोकर चार्जेस नहीं लगते हैं। साथ ही, इन फंडों में न ही आपको एंट्री फीस लगती है और न ही किसी भी प्रकार का एग्जिट लोड लिया जाता है। आप जब चाहें, तब अपनी यूनिट्स खरीद और बेच सकते हैं। लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिनमें ब्रोकर के सुझाव की कमी और खुद निर्णय लेने का दबाव शामिल हैं।
