म्यूचुअल फंड ग्लॉसरी एक तरह का आसान शब्दकोश होता है, जो म्यूचुअल फंड से जुड़े मुश्किल और तकनीकी शब्द जैसे NAV, AUM, SIP, पोर्टफोलियो या एक्सपेंस रेशियो को आसानी से समझाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नए निवेशकों में म्यूचुअल फंड की बेहतर समझ बनाना और बेहतर फैसले लेने में उनकी सहायता करना है। म्यूचुअल फंड की सभी आवश्यक टर्म को समझने के लिए आप इस लेख को पढ़ सकते हैं।
Top performing plans˜ with High Returns**
Invest ₹10K/month & Get ₹1 Crore returns*
म्यूचुअल फंड कई निवेशकों के द्वारा जमा पैसों का एक पूल होता है, जिसे एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं तो आपको उसके बदले यूनिट्स मिलती हैं, जिनकी कीमत NAV के आधार पर तय होती है और एनएवी भी प्रतिदिन बदलती रहती है। इसी प्रकार फंड से मिलने वाला फायदा या नुकसान सभी निवेशकों में उनकी हिस्सेदारी के अनुसार बाँट दिया जाता है।
म्यूचुअल फंड से जुड़े सभी टर्म की जानकारी नीचे दी गई है:
एसेट मैनेजमेंट कंपनी ऐसी कंपनी होती है, जो निवेशकों के पैसों को सही जगह इन्वेस्ट करने में मदद करती है। यह कंपनी कई निवेशकों से फंड इकट्ठा करके उन्हें शेयर्स, बॉन्ड्स और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में लगाती है। साथ ही, AMC फंड को चलाने के लिए अनुभवी फंड मैनेजर्स चुनती है, जो मार्केट के जोखिम को कम करके बेहतरीन रिटर्न देने के लिए कार्य करते हैं। आप अपने लिए एएमसी अपनी मर्जी से खुद चुन सकते हैं, इसीलिए पिछले प्रदर्शन को देखकर बेहतर कंपनी चुनें।
AUM को एसेट्स अंडर मैनेजमेंट भी कहते हैं। ये निवेशकों द्वारा जमा की गई वे कुल निवेश राशि होती है, जो किसी AMC या फंड हाउस द्वारा मैनेज की जाती है। किसी फंड हाउस का AUM जितना बड़ा होता है, उस म्यूचुअल फंड कंपनी पर निवेशकों का उतना ही अधिक भरोसा दिखता है। हालांकि, AUM हर दिन बदलता रहता है। इसी के साथ ध्यान रखें कि बड़ा AUM होने से फंड हाउस को अपने खर्चे बंट जाते हैं, जिससे एक्सपेंस रेशियो यानी लगने वाली फीस कम हो सकती है। इसीलिए ऐसा फंड चुने जिसका AUM लंबे समय से बढ़ा रहा हो।
एब्सोल्यूट रिटर्न आपको ये जानने में मदद करता है कि किसी निवेश पर एक निश्चित समय में कुल कितने प्रतिशत का लाभ या नुकसान हुआ। जैसे मान लीजिए आपने ₹10,000 निवेश किए और वह बढ़कर ₹12,000 हो गए, तो आपका एब्सोल्यूट रिटर्न सीधे 20% होगा। यह तरीका 1 साल से कम की छोटी अवधि वाले निवेश के प्रदर्शन को तुरंत समझने के लिए बेहतर और आसान माना जाता है।
जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तब आपका पैसा अलग अलग जगह निवेश होता है, जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड आदि। निवेश राशि के इसी बाँटने की प्रक्रिया को एसेट अलोक्शन कहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को नियंत्रित करना और पोर्टफोलियो को संतुलित बनाना है। आमतौर पर आपका पैसा आपकी उम्र, रिस्क लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
बेंचमार्क एक मानक मार्केट इंडेक्स होता है, जिससे आप म्यूचुअल फंड के अच्छे और बुरे प्रदर्शन की तुलना कर सकते हैं। जैसे कि यदि आपके फंड ने अपने तय बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न दिया है, तो फंड का प्रदर्शन अच्छा माना जाता है और कम दिया है, तो प्रदर्शन खराब माना जाता है। आमतौर पर SEBI के नियमानुसार हर म्यूचुअल फंड स्कीम के बेंचमार्क पहले से ही तय होते हैं, जैसे लार्ज-कैप फंड का बेंचमार्क Nifty 50 है और स्मॉल-कैप फंड का Nifty Smallcap इंडेक्स है।
Basis Point एक मानक इकाई होती है, जो शेयर बाजार की ब्याज दरों और म्यूचुअल फंड के खर्चों में होने वाले बदलावों को मापती है। सामान्य रूप से एक बेसिस पॉइंट 1 प्रतिशत के सौवें हिस्से यानी 0.01% के बराबर होती है। उदाहरण के लिए मान लीजिए यदि किसी फंड का एक्सपेंस रेशियो 1.50% से घटकर 1.25% होता है, तो इसे 25 बेसिस पॉइंट की गिरावट कहा जाएगा।
कॉर्पस का हिंदी अर्थ कुल धनराशि या पूंजी होता है। म्यूचुअल फंड में सभी निवेशकों जो राशि जमा करते हैं, उसी कुल राशि को कॉर्पस कहते हैं। आपका फंड मैनेजर इस कॉर्पस को ही शेयर मार्केट और बॉन्ड्स में निवेश करता है। साथ ही ध्यान रखे कि किसी फंड के कॉर्पस का बड़ा होना, उस फंड के प्रति लोगो का भरोसा दिखाता है, इसीलिए जब भी फंड चुनें उसके पिछले कॉर्पस को जरूर देकना चाहिए।
क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड वे फंड होते हैं जिनमें निवेश करने का अवसर केवल NFO की अवधि के दौरान ही मिलता है। इन फंड्स के अंदर मैच्योरिटी राशि निकालने के लिए लॉक-इन पीरियड होता है, जो अक्सर 3 साल से 5 साल के बीच होता है। यहीं इस फंड की खासियत भी है क्योंकि ये फंड्स आपके फंड मैनेजरों को अचानक पैसा निकालने का दबाव नहीं देते हैं, जिससे लंबी अवधि में उच्च रिटर्न बनाने में आसानी मिलती है।
कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है, जो आपके निवेश का कम से कम 75%-80% सुरक्षित जगहों पर लगाता है और बाकी के बचे भाग को इक्विटी में निवेश करता है। इस फंड से बेहतर रिटर्न के सुरक्षा की भी संभावना बढ़ती है। अगर आप भी कम बाजार के जोखिम को कम करके निवेश करना चाहते हैं, तो कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड को चुन सकते हैं।
डायरेक्ट म्यूचुअल फंड वे प्लान होते है, जिसमें निवेशक बिना किसी ब्रोकर की मदद के सीधे फंड हाउस फंड खरीदते हैं। इसमें किसी प्रकार का डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं लगता है, जिस वजह से आपका रिटर्न भी बढ़ कर मिलने की संभावना रहती है। साथ ही, कमीशन न होने के कारण डायरेक्ट फंड का एक्सपेंस रेशियो रेगुलर फंड की तुलना में अधिकतर कम होता है। यह विकल्प उन निवेशकों के लिए बेस्ट है जो खुद म्यूचुअल फंड SIP और बाजार की समझ लेना चाहते हैं।
डेट म्यूचुअल फंड में निवेशकों के पैसों का कुछ हिस्सा सरकारी, कॉरपोरेट बांड और ट्रेजरी बिलों में निवेश करना अनिवार्य होता है। इसीलिए इन फंड्स में इक्विटी फंड्स की तुलना में जोखिम काफी कम रहता है। डेट फंड्स निवेशकों को राशि निकालने के लिए छूट देती, जिससे वे आवश्यकतानुसार आसानी से निवेश रिडिम कर सकते हैं।
ELSS एक टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फंड होते हैं, जिनमें निवेश करके आप आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की कर छूट पा सकते हैं। इन फंड्स में केवल 3 साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड भी होता है, जोकि PPF या FD जैसी योजनाओं की तुलना में सबसे कम माना जाता है। साथ ही, आप ELSS में एकमुश्त पैसा लगाने के साथ-साथ हर महीने SIP के ज़रिए भी अनुशासित निवेश करने का विकल्प भी मौजूद होता है।
इक्विटी फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जो निवेशकों का अधिकतर पैसा शेयर मार्केट में निवेश करते हैं। इन फंड्स में जोखिम का स्तर थोड़ा अधिक रहता है, हालांकि लंबे समय तक निवेश करके बेहतरीन रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही, इक्विटी फंड में निवेश की प्रक्रिया बेहद आसान है और आप इसमें मात्र 500 रुपए जैसी छोटी रकम से भी अपना पोर्टफोलियो शुरू कर सकते हैं।
यह एक ऐसा इक्विटी फंड है जो लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में बिना सीमा के निवेश करता है। लेकिन SEBI के अनुसार इस फंड का कम से कम 65% पैसा इक्विटी और उससे जुड़े साधनों में लगाना अनिवार्य होता है। बाकी के पैसे को फंड मैनेजर अपनी समझ के अनुसार किसी भी फंड में लगा सकता है। इसीलिए जो निवेशक हर तरह की कंपनियों का लाभ एक ही फंड से लेना चाहते हैं, वे फ्लेक्सी-कैप फंड का उपयोग कर सकते हैं।
फ़ोलियो नंबर म्यूचुअल फंड हाउस (AMC) द्वारा निवेशक को दी जाने वाली एक पहचान संख्या होती है। इस फ़ोलियो नंबर से आप संबंधित फंड हाउस की कई अलग-अलग स्कीमों में निवेश कर सकते हैं। साथ ही, इस नंबर से आप खरीदे गए सभी यूनिट्स, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और पर्सनल डिटेल्स का पूरा रिकॉर्ड आसानी से कभी-भी चेक कर सकते हैं।
यह एक विशेष प्रकार का म्यूचुअल फंड है जो निवेशकों का पैसा इक्विटी (शेयर) और डेट (बांड) दोनों में एक साथ लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जोखिम को कम करते हुए निवेशकों को एक स्थिर और बेहतर रिटर्न प्रदान करना होता है। जैसे कि जब शेयर बाज़ार गिरता है, तो फंड का डेट हिस्सा पोर्टफोलियो को दूसरी ओर से संभालने में मदद करता है। यह फंड उन नए निवेशको के लिए बेहतर विकल्प है, जो सीधे शेयर बाज़ार के पूरे जोखिम नहीं चाहते हैं।
लार्ज-कैप फंड भारत की सबसे सुरक्षित और बेस्ट 100 कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं जिनका मार्केट मूल्य सबसे अधिक होता है। ये कंपनियां अपने सेक्टर व्यापार में स्थिर और मजबूत होती है। आमतौर पर लार्ज कैप फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प है जो कम जोखिम के साथ लंबी अवधि में शेयर बाज़ार से अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं।
लिक्विडिटी का मतलब आपकी राशि को आसानी और तेज़ी से नकद में बदलने से होता है। जैसे कि यदि किसी एसेट को बिना उसके वास्तविक मूल्य में भारी नुकसान सहे तुरंत बेचा जा सके, तो उसे हाई-लिक्विड एसेट माना जाता है। एक्पर्ट के अनुसार आपातकालीन स्थितियों से तुरंत निपटने के लिए हर व्यक्ति के पोर्टफोलियो में कुछ लिक्विड एसेट्स का होना अच्छा होता है।
लॉक-इन अवधि म्यूचुअल फंड के दौरान आपके निवेश के ऊपर रोक लगाने वाला समय होता है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को लंबी अवधि तक बाज़ार में टिकाए रखना और फंड को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना होता है। साथ ही, अगर आप लॉक-इन के समय पैसे निकालने की कोशिश करते भी हैं, तो आपको पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इसीलिए किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले फंड की लॉक-इन अवधि जरूर देखनी चाहिए।
मिड-कैप फंड शेयर बाज़ार की उन कंपनियों में निवेश करते हैं जो लार्ज-कैप से छोटी और स्मॉल-कैप से बड़ी होती हैं। इन फंड में लार्ज-कैप फंड की तुलना में बाजार का जोखिम अधिक होता है। हालांकि, इस फंड से लंबी अवधि में 12-15% उच्च रिटर्न पाने की संभावना भी काफी अधिक होती है। बड़े वित्तीय सलाहकारों द्वारा मिड कैप फंड में कम से कम 5 से 7 वर्षों के लंबे समय तक निवेश करने की सलाह दी जाती है।
मल्टी-कैप फंड शेयर बाज़ार की सभी प्रकार की कंपनियों में एक साथ निवेश करने की बेहतरीन सुविधा देते हैं। लेकिन इन फंड्स को लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप, तीनों ही श्रेणियों में कम से कम 25-25% निवेश करना अनिवार्य है। यह निश्चित बटवारा यह सुनिश्चित करता है कि निवेशकों का पैसा किसी एक आकार की कंपनी पर निर्भर न होकर विविधिकरण का लाभ ले रहा है।
म्यूचुअल फंड कंपनियां (AMC) आपके निवेश को पेशेवर रूप से संभालने के लिए जो सालाना शुल्क लेती हैं, उसे मैनेजमेंट फीस कहते हैं। आमतौर पर एक्सपेंस रेशियो भी कहा जाता है, जो आपके कुल निवेश से ही कटता है। इसमें फंड मैनेजर की फीस, बाज़ार रिसर्च का खर्च और अन्य खर्च शामिल होते हैं। इसीलिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए हमेशा कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड्स चुनना फायदेमंद होता है
जब आपके म्यूचुअल फंड निवेश का तय समय पूरा हो जाता है, तो आपका लगाया हुआ पैसा और उस पर मिला ब्याज एक साथ वापस मिल जाता है, इसी समय को मैच्योरिटी अवधि कहते हैं। यह नियम उन स्कीमों पर लागू होता है जिनमें समय पहले से तय होता है। मैच्योरिटी की तारीख खत्म होने के बाद अब आप चाहें तब अपने पूरे पैसे निकाल सकते हैं या फिर से कहीं इन्वेस्ट कर सकते हैं।
एनएवी का मतलब नेट एसेट वैल्यू होता है, जोकि सरल रूप से आपके म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स खरीदने और बेचने का मूल्य होता है। बाजार के अनुसार NAV की जो भी वर्तमान वैल्यू होगी, उसी के अनुसार आपके यूनिट्स की कीमत तय होती है। हालांकि आपके एनएवी की गणना बाजार बंद होने के बाद दैनिक आधार पर की जाती है। इसी के साथ यह ध्यान रखें कि कम NAV वाला फंड हमेशा सस्ता या बेहतर नहीं होता है, आपको फंड चुनते समय फंड के पिछले सालों के प्रदर्शन जरूर देखने चाहिए।
NFO का मतलब New Fund Offer होता है। जब कोई म्यूचुअल फंड AMC, निवेशकों के लिए कोई नया फंड ऑफर लॉन्च करती है, तब उसे NFO कहते हैं। इस ऑफर के दौरान आमतौर पर फंड की प्रति यूनिट कीमत 10 रुपये होती है। लेकिन न्यू फंड ऑफर केवल 10-15 दिनों के लिए ही होता है। इसे बाद वह फंड भी एक सामान्य फंड की तरह वर्तमान NAV के अनुसार के साथ ही निवेश करता है।
ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड वे फंड होते हैं, जिनमें आप कभी भी यूनिट्स खरीद और बेच सकते हैं। साथ ही, इन फंड्स से पैसे निकालने के लिए कोई समय सीमा नहीं होती है। लेकिन अगर आपका फंड ELSS श्रेणी का है, तो उसमें 3 साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि पूरा करना अनिवार्य होता है। ये फंड उन लोगों के लिए बेहतर है, जो अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी पैसा जमा या निकालना चाहते हैं।
किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा किए गए सभी वित्तीय निवेशों (शेयर, बॉन्ड, गोल्ड, म्यूचुअल फंड) के संग्रह को पोर्टफोलियो कहते हैं। म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट में एक अच्छा पोर्टफोलियो अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करके जोखिम को कम करने में मदद करता है। साथ ही, निवेशक की उम्र, जोखिम लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार ही इसे तैयार किया जाता है। बेहतर रिटर्न के लिए समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा और रीबैलेंसिंग करना जरूरी है।
जब निवेशक म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को बेचकर अपना पैसा वापस लेते हैं, तो उसे रिडेम्पेशन कहते हैं। पैसे निकालने के समय पर जो राशि मिलती है, वे उसी दिन के लागू NAV के आधार पर तय होती है। इस प्रक्रिया में निवेशक के पास अपनी जरूरत के अनुसार पूरी या आंशिक यूनिट्स रिडीम करने का विकल्प होता है। लेकिन कुछ फंड्स में तय अवधि से पहले रिडेम्पशन पर एग्जिट लोड लग सकता है।
स्मॉल कैप फंड आपके निवेश का कम से कम 65% छोटी कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है, जिस वजह से फंड में बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है। हालांकि, ये कंपनियां तेज़ी से बढ़ने की क्षमता रखती है, इसलिए आप इस फंड से लंबे समय में जोखिम कम करके 15-18% का बेहतरीन रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। यह फंड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो 5 से 7 साल तक की लंबी अवधि तक निवेश कर सकते हैं।
टैक्स सेविंग फंड एक इक्विटी म्यूचुअल फंड है, जिसमें निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत आपको कई तरह की टैक्स छूट मिलती है। इसमें केवल 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जो अन्य टैक्स सेविंग विकल्पों की तुलना में कम है। साथ ही, ये फंड मुख्य रूप से शेयर बाजार में निवेश करता है, जिससे टैक्स बचत के साथ लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है। आप SIP के जरिए टैक्स सेविंग फंड में आसानी से निवेश कर सकते हैं।
म्यूचुअल फंड छोटे-बड़े सभी प्रकार के निवेशकों के लिए वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने का एक बेहतरीन व सुरक्षित साधन है। यह आपके पैसों को सही तरीके से मैनेज करने की सुविधा देता है,साथ ही SIP के जरिए अनुशासन और कम्पाउंडिंग का फायदा भी प्रदान करता है,लेकिन याद रखे कि म्यूचुअल फंड बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं। इसलिए किसी भी स्कीम में निवेश करने से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता,समय सीमा और वित्तीय लक्ष्यों का सही आकलन करें।
*All savings are provided by the insurer as per the IRDAI approved insurance
plan.
*Tax benefit is subject to changes in tax laws. Standard T&C Apply
++Source - Google Review Rating available on:- http://bit.ly/3J20bXZ
˜The insurers/plans mentioned are arranged in order of highest to lowest first year premium (sum of individual single premium and individual non-single premium) offered by Policybazaar’s insurer partners offering life insurance investment plans on our platform, as per ‘first year premium of life insurers as at 31.03.2025 report’ published by IRDAI. Policybazaar does not endorse, rate or recommend any particular insurer or insurance product offered by any insurer. For complete list of insurers in India refer to the IRDAI website www.irdai.gov.in
^^The information relating to mutual funds presented in this article is for educational purpose only and is not meant for sale. Investment is subject to market risks and the risk is borne by the investor. Please consult your financial advisor before planning your investments.