म्यूचुअल फंड में पैसे लगाते समय लोग अक्सर रिटर्न तो देख लेते हैं लेकिन उस पर लगने वाली फीस पर ध्यान देना भूल जाते हैं। फंड मैनेज करने के बदले AMC आपके निवेश से शुल्क काटती है। इसमें एक्सपेंस रेशियो, एग्जिट लोड और ट्रांजैक्शन फीस शामिल हैं। यदि आप इनपर ध्यान नहीं देंगे तो आपका रिटर्न कम हो सकता है। ऐसे में फंड चुनने से पहले इनपर भी ध्यान दें।
Top performing plans˜ with High Returns**
Invest ₹10K/month & Get ₹1 Crore returns*
म्यूचुअल फंड फीस आपके फंड पर लगने वाला वह शुल्क है, जो एसेट मैनेजमेंट कंपनी या फंड हाउस आपके निवेशित फंड को संचालित यानी मैनेज करने के लिए लेते हैं। यह शुल्क सीधे आपके निवेश से काटा जाता है, जिस वजह से आपका कुल रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है। आपकी म्यूचुअल फंड मैनेजमेंट फीस में एक्सपेंस रेशियो (TER), एग्जिट लोड, ट्रांजैक्शन आदि भी शामिल होते हैं।
सेबी नियमों के अनुसार वर्तमान में आपके म्यूचुअल फंड फीस में निम्न तरीके से एक्सपेंस रेशियो जुड़ता है:
| इक्विटी फंड AUM | अधिकतम एक्सपेंस रेशियो |
| पहले ₹500 करोड़ तक | 2.25% |
| अगले ₹250 करोड़ | 2.00% |
| अगले ₹1,250 करोड़ | 1.75% |
| ₹50,000 करोड़ से अधिक | 1.05% |
म्युचुअल फंड में SIP के दौरान मुख्य तौर पर निम्न मामलों में फीस ली जाती है:
यह फंड के प्रबंधन और संचालन के लिए लिया जाने वाला वार्षिक प्रतिशत शुल्क है। यह राशि सीधे आपके फंड के कुल मूल्य यानी NAV से काट ली जाती है। इसमें डेली फीस का फॉर्मूला,
= निवेश का कुल मूल्य * (एक्सपेंस रेशियो/365)
मान लीजिए आपने म्यूचुअल फंड में ₹1,00,000 का निवेश किया है, जिस पर उस फंड का एक्सपेंस रेशियो 1.5% वार्षिक है।
फंड हाउस को चलाने के लिए होने वाले प्रशासनिक, कानूनी और ऑडिट से जुड़े खर्चे इसमें शामिल होते हैं। यह खर्च भी एक्सपेंस रेशियो का ही एक हिस्सा होता है।
यह समय से पहले निवेश निकालने पर लगने वाली पेनल्टी फीस होती है। यदि आप फंड की तय अवधि से पहले अपने पैसे निकालते हैं, तो यह शुल्क काटा जाता है, जो अधिकतर 1-2% तक हो सकता है।
म्यूचुअल फंड में यह फीस ₹10,000 से अधिक के निवेश पर डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से पहली बार निवेश करने पर लगने वाला एकमुश्त शुल्क है। हालांकि, डायरेक्ट प्लान में निवेश करने पर यह शुल्क नहीं लगता।
फंड में जब डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश करना होता है, तब जो भी कमीशन या चार्जेस लगते हैं, वे भी म्यूचुअल फंड फीस में शामिल होता है।
डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान की मैनेजमेंट फीस में मुख्य अंतर क्या है:
म्युचुअल फंड में निवेश करने पर कोई फिक्स्ड फीस नहीं ली जाती है। यह आपके फंड के एक्सपेंस रेशियो, फंड मैनेजर, तय एग्जिट लोड शुल्क और लेन-देन के ऊपर निर्भर करता है। साथ ही, यदि आप ब्रोकर चार्जेस से बचना चाहते हैं, तो डायरेक्ट प्लान से जुड़े फंड में निवेश कर सकते हैं। इसमें ब्रोकर फीस के बजाय केवल फंड मैनेजमेंट जैसे फंड मैनेजर की फीस जाती है।
*All savings are provided by the insurer as per the IRDAI approved insurance
plan.
*Tax benefit is subject to changes in tax laws. Standard T&C Apply
++Source - Google Review Rating available on:- http://bit.ly/3J20bXZ
˜The insurers/plans mentioned are arranged in order of highest to lowest first year premium (sum of individual single premium and individual non-single premium) offered by Policybazaar’s insurer partners offering life insurance investment plans on our platform, as per ‘first year premium of life insurers as at 31.03.2025 report’ published by IRDAI. Policybazaar does not endorse, rate or recommend any particular insurer or insurance product offered by any insurer. For complete list of insurers in India refer to the IRDAI website www.irdai.gov.in
^^The information relating to mutual funds presented in this article is for educational purpose only and is not meant for sale. Investment is subject to market risks and the risk is borne by the investor. Please consult your financial advisor before planning your investments.