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ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड

ओपन एंडेड फंड से आप कभी भी अपनी निवेश राशि निकाल सकते हैं। ये ऐसे फंड होते हैं, जिनमें पैसे निकालने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती है। साथ ही, इन फंड्स का NAV हर दिन बाजार बंद होने के बाद अपडेट होता है, जिसके आधार पर आप यूनिट्स खरीद और बेच सकते हैं। इस लेख में ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड की पूरी जानकारी दी गई है।

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ओपन-एंडेड फंड का मतलब क्या होता है?

ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड वे फंड होते हैं, जिनमें आप कभी भी यूनिट्स खरीद और बेच सकते हैं। इनमें पैसे निकालने के लिए कोई समय सीमा नहीं होती है। हालांकि, यदि फंड ELSS श्रेणी का है, तो उसमें 3 साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि लागू होती है। ओपन एंडेड फंड्स का NAV भी दैनिक आधार पर बदलता रहता है।

ओपन-एंडेड फंड का उदाहरण

भारत के लगभग 90% म्यूचुअल फंड ओपन-एंडेड फंड ही होते हैं, जिनसे आप कभी भी पैसे निकाल सकते हैं। जैसे - SBI Nifty Index Fund। इसके अलावा जिन फंड्स में मैच्योरिटी तक लॉक-इन रहता है, उन्हें क्लोज एंडेड फंड कहते हैं।

ओपन एंडेड फंड के मुख्य प्रकार

ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा ज सकता है, जिनसे आप कभी भी अपने पैसे निकाल सकते हैं:

  • इक्विटी फंड - ओपन एंडेड फंड का यह प्रकार मुख्य रूप से शेयर मार्केट के स्टॉक्स में निवेश करता है, जिस वजह से जोखिम थोड़ा अधिक रहता है। लेकिन लंबी अवधि में बेहतरीन संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी फंड बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
  • डेट फंड - म्यूचुअल फंड निवेश के दौरान डेट फंड को अक्सर इक्विटी फंड की तुलना में सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि ये फंड आमतौर पर आपके निवेश का पैसा सरकारी बॉन्ड और ट्रेजरी बिल जैसी निश्चित जगहों पर लगाते हैं।
  • हाइब्रिड फंड - ओपन एंडेड हाइब्रिड म्यूचुअल फंड वे फंड होते हैं, जो इक्विटी और डेट दोनों में एक साथ निवेश करते हैं। इससे इक्विटी के जरिए रिटर्न और डेट के जरिए बाजार से सुरक्षा दोनों का लाभ एक साथ लिया जा सकता है।

ओपन-एंडेड और क्लोज-एंडेड फंड में क्या अंतर है?

नीचे ओपन-एंडेड और क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड के बीच मुख्य अंतर की जानकारी दी गई है:

विशेषता ओपन-एंडेड फंड्स क्लोज्ड-एंडेड फंड्स
निवेश का समय आप इसमें कभी भी निवेश कर सकते हैं इसमें केवल NFO के दौरान ही निवेश किया जा सकता है।
पैसे निकालना आप कभी भी यूनिट्स बेचकर पैसे निकाल सकते हैं। मैच्योरिटी अवधि पूरी होने से पहले पैसे नहीं निकाल सकते हैं।
लॉक-इन अवधि इसमें कोई लॉक-इन अवधि नहीं होती है (ELSS फंड को छोड़कर)। इसमें एक निश्चित लॉक-इन अवधि होती है।
ट्रेडिंग का तरीका रिडेम्पशन सीधे AMC के माध्यम से NAV पर होता है। शेयर बाजार पर शेयर की तरह खरीदे-बेचे जाते हैं।

ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड में कैसे निवेश करें?

ओपन-एंडेड फंड में निवेश करने के लिए दिए गए स्टेप्स का पालन करें:

  • स्टेप 1 - अपने आधार और पैन से KYC कराएं।
  • स्टेप 2 - किसी भी म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट पर जाएं।
  • स्टेप 3 - इसके बाद इक्विटी या डेट फंड चुनें।
  • स्टेप 4 - अपनी क्षमता के अनुसार एक ओपन-एंडेड फंड चुनें।
  • स्टेप 5 - फिर SIP राशि सेट करें और पेमेंट कर दें।

इसके बारे में और जानें : म्यूचुअल फंड्स के बारे में और जानें

निष्कर्ष

म्यूचुअल फंड मार्केट में सबसे ज्यादा ओपन एंडेड फंड ही मौजूद हैं, जिनसे आप किसी भी समय राशि निकासी कर सकते हैं। इनमें निवेश करना बेहद ही सरल होता है, क्योंकि ये मुख्य रूप से बिना किसी लॉक इन अवधि के साथ आते हैं। इनमें आप अपनी सुविधा के अनुसार SIP या एकमुश्त के जरिए निवेश शुरू कर सकते हैं। साथ ही, इनकी नेट एसेट वैल्यू बाजार के उतार-चढ़ाव के आधार पर रोजाना बदलती रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • कौन सा बेहतर है, ओपन-एंडेड या क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड?

    ओपन एंडेड फंड में निवेश निकालने पर कोई नियम नहीं होता है, वहीं क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड में एक निश्चित अवधि के लिए यूनिट्स की खरीद और बिक्री पर रोक हो सकती है।
  • क्या मैं ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड बेच सकता हूँ?

    जी हाँ, आप अपने ओपन-एंडेड फंड की यूनिट्स कभी भी बेच सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आपका फंड ELSS कर बचत कैटेगरी में नहीं होना चाहिए।
  • ओपन-एंडेड फंड के फायदे क्या हैं?

    ओपन-एंडेड फंड का सबसे अच्छा फायदा यही है कि निवेशक इसमें से कभी भी यूनिट्स बेच सकते हैं। साथ ही, इनकी NAV रोजाना बाजार बंद होने के बाद दिन में एक बार बदलती है।
Claude
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