म्यूचुअल फंड रिटर्न क्या है?
म्यूचुअल फंड रिटर्न का सीधा-सीधा मतलब है कि आपके निवेश किए हुए पैसे पर फायदा हुआ या नुकसान। जब आप किसी म्यूचुअल फंड में पैसे निवेश करते हैं तो उसे शेयर बाजार या बॉन्ड्स में लगाया जाता है, इसके बाद जब समय के साथ कंपनी या बॉन्ड्स की वैल्यू बढ़ती या घटती है तो आपके पैसे भी कम ज्यादा होते हैं, इसी को म्यूचुअल फंड रिटर्न कहते हैं।
म्यूचुअल फंड में रिटर्न कैसे तय होता है?
यहां निम्नलिखित फैक्टर्स बताएं गए हैं, जो म्युचुअल फंड रिटर्न को प्रभावित करते हैं:
- फंड का प्रकार - म्युचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न काफी हद तक फंड के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर आप स्मॉल कैप म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं तो लगभग 15-18% तक रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है, मिड कैप से 12-14% और लार्ज कैप फंड 10-12% का रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि स्मॉल कैप और मिड कैप फंड हाई रिस्क वाले होते हैं।
- बाजार का प्रदर्शन - म्युचुअल फंड के अंतर्गत आपका पैसा मुख्य रूप से इक्विटी या डेट में निवेश किया जाता है। ऐसे में जब बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है तो आपको ज्यादा रिटर्न मिलता है और जब बाजार नीचे आता है तो कम रिटर्न मिलता है।
- एक्सपेंस रेशियो - अगर आपके म्युचुअल फंड AMC का पैसे को मैनेज करने का चार्ज ज्यादा है तो मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है। इसलिए हमेशा कम एक्सपेंस रेशियो वाले म्युचुअल फंड का ही चयन करें।
- निवेश की अवधि - म्यूचुअल फंड निवेश आमतौर पर लंबी अवधि का निवेश माना जाता है, ऐसे में अगर आप कम अवधि जैसे 2-3 साल का निवेश करेंगे तो कंपाउंडिंग का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे।
- फंड मैनेजर का अनुभव - यह एक बहुत जरूरी पॉइंट है, अगर एक सही मैनेजर आपको पैसे को मैनेज नहीं करेगा तो इसका सीधा असर आपके रिटर्न पर पडे़गा।
म्यूचुअल फंड रिटर्न की ऑनलाइन गणना कैसे करें?
म्यूचुअल फंड रिटर्न की गणना करने के लिए आप कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं:
- स्टेप 1 - म्यूचुअल फंड कैलकुलेटर पर जाएं।
- स्टेप 2 - कैलकुलेटर में निवेश का प्रकार चुनें, SIP या लंपसम।
- स्टेप 3 - अब कैलकुलेटर में निवेश राशि और अवधि दर्ज करें।
- स्टेप 4 - अब अपेक्षित रिटर्न दर्ज करें।
- स्टेप 5 - अब कैलकुलेटर आपको रिटर्न और कुल मैच्योरिटी अमाउंट की जानकारी देगा।
म्युचुअल फंड से बेहतर ब्याज पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
म्युचुअल फंड से बेहतर रिटर्न पाने के लिए आप कुछ मुख्य बातों पर ध्यान दिया जा सकता है:
- सही अवधि का चयन करें - अपने पैसे को बढ़ने के लिए सही समय देना बहुत जरूरी है, तभी आपको एक अच्छा रिटर्न मिलेगा। इसलिए वित्तीय योजना बनाते समय अवधि का खास ध्यान रखें।
- कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड - म्यूचुअल फंड का चयन करते समय सभी फंड्स का एक्सपेंस रेशियो की जाँच और तुलना करें और जिस फंड का एक्सपेंस रेशियो कम हो उसका चयन करें।
- जोखिम क्षमता को जाने - निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता को जानकर ही निवेश करें, इससे आप एक अच्छा निवेश कर पाएंगे।
- नियमित नज़र रखें - बाजार में आपके पैसे कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, इसकी जाँच करते रहें। यदि किसी बदलाव की जरूरत हो तो समय रहते उसे करें।
- डायरेक्ट प्लान चुनें - डायरेक्ट प्लान चुन कर आप एक्पेंस रेशियो से छुटकारा पा सकते हैं। लंबी अवधि में इससे बेहतर मैच्योरिटी वैल्यू प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
म्यूचुअल फंड, निवेश की दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेंड है। पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों की संख्या में तेज़ी से इजाफा हुआ है, अब वह चाहे एकमुश्त निवेश करने वाले हों या SIP के माध्यम से। निवेश करने से पहले लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि म्यूचुअल फंड से कितना ब्याज मिलेगा?, देखिए म्यूचुअल फंड से ब्याज नहीं मिलती है, इसमें आपका पैसा बाजार में लगाया जाता है, इसलिए इससे रिटर्न मिलता है। मिलने वाला रिटर्न कई कारणों से कम-ज्यादा हो सकता है। लेकिन अगर आप सोच-समझकर एक सही फंड चुनते हैं, तो आप एक बड़ा फंड तैयार करने में सफल हो सकते हैं। साथ ही अगर आप एक साथ बड़ी रकम नहीं लगाना चाहते हैं, तो SIP के माध्यम से थोड़ा-थोड़ा निवेश भी कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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1 साल में म्यूचुअल फंड कितना रिटर्न देता है?
म्यूचुअल फंड में मिलने वाला रिटर्न बाजार के प्रदर्शन और आपके द्वारा चुने गए फंड के आधार पर तय होता है। ऐसे में मिलने वाला रिटर्न सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है।
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म्यूचुअल फंड में पैसा डूब जाता है क्या?
नहीं, ऐसा हर बार हो ऐसा जरूरी नहीं होता है। दरअसल म्यूचुअल फंड्स में जोखिम होता है। इसलिए लोगों को अक्सर लगता है कि इसमें पैसा डूब जाता है लेकिन अगर आप सोच-समझकर एक सही फंड का चयन करेंगे तो आपका पैसा नहीं डूबेगा।
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म्यूचुअल फंड में कितना ब्याज मिलता है?
म्यूचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न फिक्स नहीं होता (Mutual fund mein kitna byaaj milta hai) है, बल्कि यह बाजार के प्रदर्शन के आधार पर तय किया जाता है। इसमें आपका पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है, फिर आपका फंड जैसा प्रदर्शन करता है आपको उसी अनुसार रिटर्न मिलता है।